
हेल्थ डेस्क। हाल ही में एक शोध में यह बात सामने आई है कि तनाव और चिंता की वजह से समय से पहले बाल सफेद होने लगते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्दी ही इस समस्या को दूर करने के उपाय ढूंढ लिए जाएंगे। 'नेचर' मैगजीन में प्रकाशित एक शोध लेख में बताया गया है कि चूहों पर किए गए एक प्रयोग से पता चला कि तनाव से स्टेम सेल्स नष्ट होने लगते हैं, जिससे स्किन और बालों के रंग पर असर पड़ता है।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहों पर प्रयोग कर पता लगाया कि किस तरह तनाव और चिंता का असर बालों के रंग पर पड़ता है। तनाव के साथ शारीरिक पीड़ा का भी इससे संबंध है। तनाव और चिंता होने पर कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन काफी मात्रा में निकलने लगता है। यह उन सेल्स को बुरी तरह प्रभावित करता है, जो बालों और शरीर के रंग को सामान्य बनाए रखने में मददगार होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना था कि उन्होंने प्रयोग के दौरान देखा कि तनाव की स्थिति में रखने पर चूहों के शरीर और बालों के रंग में एक हफ्ते से कम समय में ही काफी फर्क आ गया। काले चूहे पूरी तरह से सफेद नजर आने लगे।
इस रिसर्च से एक बात यह पता चली कि एक खास प्रोटीन जिसे CDK कहते हैं, सेल को डैमेज करने लगता है। यह प्रोटीन तनाव की हालत में तेजी से बनता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वे इसे लेकर काम कर रहे हैं कि कैसे इस प्रोटीन का बनना बंद किया जा सकता है, ताकि समय से पहले बालों को सफेद होने से रोका जा सके। वैज्ञानिकों का कहना था कि इससे बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकने के लिए इलाज की खास विधि विकसित की जा सकती है।
बहरहाल, उनका कहना है कि अभी इसे लेकर और भी रिसर्च किए जाने की जरूरत है। यह जरूरी नहीं कि जैसी प्रक्रिया चूहों में देखी गई है, ठीक वैसी ही मनुष्यों में भी हो। लेकिन अब तक चूहों पर जो भी प्रयोग किए गए हैं, वे इंसानों के लिए भी कामयाब रहे हैं।
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