बाबा बैजनाथ के बाद बासुकीनाथ का सर्वाधिक महत्व, उनके दर्शन के बिना अधूरी है बाबा की पूजा

Published : Jul 13, 2022, 07:06 PM IST
बाबा बैजनाथ के बाद बासुकीनाथ का सर्वाधिक महत्व, उनके दर्शन के बिना अधूरी है बाबा की पूजा

सार

झारखंड के दुमका जिले में स्थित बाबा बासुकीनाथ की यात्रा के बिना वहां बाबा बैजनाथ में की गई पूजा अधूरी होती है। जब वहां दर्शन कर लिए जाते है तभी आपकी सभी मनोकमनाए पूरी होती है। सावन में यहां भी लगेगी भक्तों की भीड़।

दुमका. झारखंड राज्य के दुमका जिले में स्थित है बासुकीनाथ मंदिर जहाँ भगवान शिव, बासुकीनाथ के रूप में पूजे जाते हैं। यह कहा जाता है कि जब तक बासुकीनाथ के दर्शन न किए जाएँ तब तक देवघर स्थित बाबा बैजनाथ के दर्शन अधूरे ही माने जाएँगे। बासुकीनाथ मंदिर झारखंड के कुछ अतिप्राचीन मंदिरों में से एक है। मंदिर के पास ही एक तालाब स्थित है जिसे वन गंगा या शिवगंगा भी कहा जाता है। इसका जल श्रद्धालुओं के लिए अति पवित्र माना जाता है। मुख्य मंदिर के अलावा परिसर में अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की स्थापना भी की गई है। मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में हुई। बासुकीनाथ मंदिर का इतिहास भी सागर मंथन से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि सागर मंथन के दौरान पर्वत को मथने के लिए वासुकी नाग को माध्यम बनाया गया था। इन्हीं वासुकी नाग ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी। यही कारण है कि यहाँ विराजमान भगवान शिव को बासुकीनाथ कहा जाता है।

बाबा बैजनाथ के बाद सर्वाधिक महत्व बासुकीनाथ मंदिर का
देश के कोने-कोने से आने वाले शिव भक्त पहले देवघर स्थित बाबा बैजनाथ धाम पहुँचते हैं और भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करते हैं। हालाँकि, बाबा बैजनाथ के बाद अधिकांश श्रद्धालु बासुकीनाथ ही पहुँचते हैं। मान्यता भी है कि जब तक बासुकीनाथ के दर्शन न किए जाएँ तब तक बाबा बैजनाथ की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी। श्रद्धालु अपने साथ गंगाजल और दूध लेकर बासुकीनाथ पहुँचते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हिंदुओं में यह मान्यता है कि बाबा बैजनाथ में विराजमान भगवान शिव जहाँ दीवानी मुकदमों की सुनवाई करते हैं। वहीं बैजनाथ धाम से लगभग 45 किमी दूर स्थित बासुकीनाथ में विराजित भोलेनाथ श्रद्धालुओं की फौजदारी फ़रियाद सुनते हैं और उनका निराकरण करते हैं। बासुकीनाथ में भगवान शिव का स्वरूप नागेश का है। यही कारण है कि यहाँ भगवान शिव को दूध अर्पित करने वाले भक्तों को भगवान शिव का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 

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