
उज्जैन. चैत्र मास की विशेषता देखें तो 5 सोमवार और 5 मंगलवार का योग बन रहा है। यह एक दुर्लभ संयोग है कि हस्त नक्षत्र में सोमवार का आरंभ होगा तथा स्वाति नक्षत्र में मंगलवार के दिन चैत्र मास का समापन होगा। इस बार विशेष ये है कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा। हालांकि यह अमावस्या प्रात: 8.02 तक रहेगी। किंतु उदयकाल की अमावस्या अस्तकाल तक अनुष्ठान को सिद्ध करने वाली मानी गई है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार, सोमवार को रेवती नक्षत्र, वैधृति योग, नाग करण एवं मीन राशि का चंद्रमा उत्तरोत्तर वैदिक तंत्र से संबंधित अनुष्ठान के लिए अनुकूल माने गए हैं। सोमवार को आने से ये सोमवती अमावस्या कहलाएगी। साथ ही जब अमावस्या पर पंचक के पांचवें नक्षत्र का प्रभाव हो और मीन राशि के चंद्रमा की साक्षी हो तो पितृ कर्म के साथ-साथ यह लक्ष्मी साधना के लिए भी श्रेष्ठ मानी गई है।
हिंदू वर्ष की अंतिम सोमवती अमावस्या
यह भी संयोग है कि वर्ष का आरंभ रेवती नक्षत्र में हुआ था और समापन भी रेवती नक्षत्र पर ही हो रहा है। ऐसे संयोग बहुत कम बनते हैं जब नक्षत्र मेखला की गणना में इस प्रकार का चक्र बनता हो कि आरंभ नक्षत्र ही वर्ष का समापन नक्षत्र बन जाता है। चूंकि रेवती नक्षत्र मीन राशि के चक्र मंडल से संबंधित है और इसका स्वामी बुध है। ये ग्रह व्यवसाय की गतिविधियों पर अपना नियंत्रण रखता है। अर्थात इस नक्षत्र व ग्रह की स्थिति पर यदि किसी पाप ग्रह या विपरीत नक्षत्र के प्रभाव पड़ते हैं तो वर्ष पर्यंत बिजनेस की स्थिति प्रभावित होती है।
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