गुरु के राशि बदलने से बढ़ सकते हैं धार्मिक विवाद, बनेंगे दुर्घटना के योग, अशुभ फल से बचने के लिए करें ये उपाय

Published : Sep 15, 2021, 10:19 AM ISTUpdated : Sep 15, 2021, 11:28 AM IST
गुरु के राशि बदलने से बढ़ सकते हैं धार्मिक विवाद, बनेंगे दुर्घटना के योग, अशुभ फल से बचने के लिए करें ये उपाय

सार

14 सितंबर, मंगलवार से गुरु ग्रह राशि बदलकर कुंभ से मकर राशि में आ चुका है। खास बात ये है कि इस बार गुरु वक्री यानी टेढ़ी चाल से चलते हुए आगे की बजाए एक राशि पीछे की ओर आया है। जब गुरु वक्री अवस्था में होता है, तभी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है।

उज्जैन. ज्योतिषियों के अनुसार, गुरु ग्रह 18 अक्टूबर से मकर राशि में मार्गी यानी सीधी चाल से चलने लगेगा। इसके बाद 21 नवंबर को मकर से निकलकर पुन: कुंभ राशि में आएगा। ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, शिक्षा, धन वृद्धि और धार्मिक कार्य का कारक माना जाता है। गुरु के वक्री अवस्था में राशि बदलने से देश-दुनिया पर इसका असर दिखाई देगा।

इस तरह रहेगी ग्रह स्थिति
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, गुरु वक्री होकर शनि की राशि यानी मकर में रहेगा। यहां पहले से ही शनि भी वक्री है। जिससे गुरु और शनि की युति बन जाएगी। जिससे इन दोनों ग्रहों पर अब राहु की पूरी दृष्टि रहेगी। वहीं, अक्टूबर के आखिरी में इन ग्रहों पर मंगल की भी दृष्टि पड़ेगी। ग्रहों की ये स्थिति देश-दुनिया के लिए ठीक नहीं रहेगी।

तेज बारिश और दुर्घटना की आशंका
- गुरु की चाल में बदलाव होने से देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की होने के योग बन रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में असंतोष की स्थिति रहेगी। धार्मिक विवाद बढ़ सकते हैं।
- किसी धर्म स्थान से जुड़ी दुर्घटना की भी आशंका बन रही है। पहाड़ी इलाको में लैंड स्लाइड होने का अंदेशा है, जिससे आवाजाही में रुकावटें बढ़ेंगी। साथ ही किसी बड़े नेता के निधन की खबर भी मिल सकती है।

अभी वक्री, 18 अक्टूबर से होंगे मार्गी
गुरु ग्रह की वक्री यानी टेढ़ी चाल को अशुभ फल देने वाला माना जाता है। क्योंकि ये ग्रह इस अवस्था में पीड़ित माना जाता है। गुरु 18 सितंबर को मार्गी होगा यानि सीधी चाल से चलने लगेगा। इसके बाद 21 नवंबर को फिर राशि बदलकर कुंभ में चला जाएगा, जिससे शनि के साथ बनने वाली युति खत्म हो जाएगी।

गुरु ग्रह की पूजन विधि व उपाय
देवगुरु बृहस्पति (गुरु ग्रह) की पूजा हमेशा शुक्लपक्ष में गुरुवार से करनी चाहिए। चूंकि इस वक्त भाद्रपद महीने का शुक्लपक्ष चल रहा है। ऐसे में उनकी पूजा और व्रत के लिए ये शुभ समय है। बृहस्पतिवार को अपने हाथों में पीले फूल लेकर बृहस्पति देवता का आवाहन करें। साथ ही बृहस्पति देवता के मंत्र, बीज मंत्र, बृहस्पति गायत्री एवं बृहस्पति स्तोत्र का पाठ करें। इससे गुरु के अशुभ असर में कमी आएगी।

गुरु के उपाय
गुरु का राशि परिवर्तन जिन्हें अशुभ हो वह शांति के लिए उपाय कर सकते है। डॉ. मिश्र बताते हैं कि चने की दाल, हल्दी, केला, पीला वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें दान करें। भगवान विष्णु या केले की पूजा अर्चना करें। केले की जड़ या पुखराज रत्न धारण करें। बुजुर्गों, साधु संतों व ब्राह्मणों का सम्मान करें। इन उपायों से राशि का अशुभ प्रभाव कम किया जा सकता है।

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