
उज्जैन. ज्योतिषीय गणना के लिए पंचांग बहुत आवश्यक है। इसे तिथि पत्र या पत्रा भी कहते हैं। इसका नाम पंचांग इसलिए है कि इसके पांच मुखय अंग होते हैं – तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। पंचांग प्रकरण, श्लोक 1 में कहा गया है – तिथि वारिश्च नक्षत्रां योग करणमेव च। एतेषां यत्रा विज्ञानं पंचांग तन्निगद्यते॥ पंचांग दो पद्धतियों पर निर्मित होते हैं – सायन और निरयन। जिन ग्रंथों से हमारे पंचांग बनते हैं वे कम से कम 500 वर्ष पुराने हैं। पंचांग में महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, एक हिंदू वर्ष में 12 महीने होते हैं। इनका क्रम इस प्रकार है- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भादौ, आश्विन, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ, फाल्गुन। प्रत्येक महीन दो पखवाड़ों में बंटा होता है, जिसे पक्ष कहते हैं कृष्ण और शुक्ल। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
1 जून का पंचांग (Aaj Ka Panchang 1 June 2022)
1 जून 2022, दिन बुधवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि रहेगी। इस दिन सूर्योदय मृगशिरा नक्षत्र में होगा, जो दोपहर 1 बजे तक रहेगा। इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। बुधवार को पहले मृगशिरा नक्षत्र होने से अमृत नाम का शुभ योग और उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र होने से मूसल नाम का अशुभ योग इस दिन बन रहा है।
इस दिन राहुकाल दोपहर दोपहर 12:24 PM से 2:04 PM तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
बुधवार को चंद्रमा मिथुन राशि में, सूर्य और बुध ग्रह वृषभ राशि में, राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में, मंगल, गुरु और शु्क्र मीन में और शनि कुंभ राशि में रहेंगे। बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि निकलना पड़े तो तिल या धनिया खाकर घर से बाहर निकलें।
1 जून के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रमी संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- ज्येष्ठ
पक्ष- शुक्ल
दिन- बुधवार
ऋतु- ग्रीष्म
नक्षत्र- मृगशिरा और आर्द्रा
करण- बालव और कौलव
सूर्योदय - 05:44 AM
सूर्यास्त - 07:04 PM
चन्द्रोदय- 6:49 AM
चन्द्रास्त - Jun 01 8:57 PM
अभिजीत मुहूर्त – आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है।
1 जून का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 7:24 AM – 9:04 AM
कुलिक - 10:44 AM – 12:24 PM
दुर्मुहूर्त - 11:58 AM – 12:51 PM
वर्ज्यम् - 10:29 PM – 12:17 AM
नक्षत्र मंडल का छठा नक्षत्र है आर्द्रा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आर्द्रा का अर्थ होता है नमी। आर्द्रा 27 नक्षत्रों में से छठे स्थान पर आता है। यह तारों का समूह न होकर सिर्फ एक तारा है। जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है तो बारिश के योग बनते हैं। यह राहू का नक्षत्र है व मिथुन राशि में आता है। इसकी दशा 18 वर्ष की होती हैं। जिन लोगों का जन्म इस नक्षत्र में होता है वह बड़े ही चतुर और चालाक होते हैं। कूटनीति एवं राजनीतिक विषयों में इनकी बुद्धि खूब चलती है। ये किसी बड़े सरकारी पद पर या बड़े राजनेता हो सकते हैं।
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