
उज्जैन. पहले के समय में हर घर में पंचांग अनिवार्य रूप से होता था क्योंकि इसे हिंदू कैलेंडर के रूप में उपयोग किया जाता था। आजकल कई प्रकार के पंचाग प्रयोग में लाये जाते हैं। इनमें से कुछ पंचांग सौर वर्ष पर और कुछ चंद्र वर्ष पर आधारित हैं। इन पंचांगों में दिन भर के शुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, चौघड़ियां आदि के बारें विस्तार पूर्वक बताया जाता है। इतना ही नहीं बल्कि कौन-सा ग्रह किस राशि में इसकी जानकारी भी पंचांग में उपलब्ध रहती है। अगर कोई भी शुभ कार्य करना हो तो इसके लिए पंचांग से मुहूर्त जरूर देखा जाता है। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
17 जुलाई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 17 July 2022)
17 जुलाई 2022, दिन रविवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 10:49 तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन को सूर्योदय शतभिषा नक्षत्र में होगा, जो शाम 06.42 तक रहेगा, इसके बाद पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। रविवार को पहले शतभिषा नक्षत्र होने से राक्षस नाम का अशुभ योग और उसके बाद पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र होने से चर नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। साथ ही इस दिन सौभाग्य और शोभन नाम के 2 अन्य शुभ योग भी रहेंगे। इस दिन राहुकाल शाम 05:31 से 7:11 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
रविवार को सूर्य राशि बदलकर मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि में बुध पहले से ही स्थित है। चंद्रमा इस दिन कुंभ राशि में, शुक्र मिथुन राशि में, शनि मकर राशि (वक्री), मंगल और राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में और गुरु (वक्री) मीन राशि में रहेंगे। रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दलिया, घी या पान खाकर ही घर से निकलें।
17 जुलाई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- श्रावण
पक्ष- कृष्ण
दिन- रविवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- शतभिषा और पूर्वा भाद्रपद
करण- बालव और कौलव
सूर्योदय - 5:55 AM
सूर्यास्त - 7:11 PM
चन्द्रोदय - Jul 17 10:27 PM
चन्द्रास्त - Jul 18 10:26 AM
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:06 से 12:59 तक
17 जुलाई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 12:32 PM – 2:12 PM
कुलिक - 3:52 PM – 5:31 PM
दुर्मुहूर्त - 05:24 PM – 06:17 PM
वर्ज्यम् - 07:32 PM – 09:04 PM
व्याघात योग (Vyaghat Yoga)
ज्योतिष शास्त्र में 27 शुभ-अशुभ योगों के बारे में बताया गया है। ये पंचांग के 5 अंगों में से एक है। इनमें से तेरहवें योग का नाम व्याघात है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग तो बहुत ही अशुभ माना गया है, इसलिए इस योग में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। इस योग में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह मनुष्य हर प्रकार के कार्य करने में निपुण होता है। ये काफी गुणवान होते हैं और समाज से इन्हें मान सम्मान मिलता है। ये अपने गुणों एवं कार्यों से दुनिया में विख्यात होते हैं।
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