
उज्जैन. प्राचीन काल में पंचांग हमारे दैनिक जीवन का एक अंग हुआ करता था, क्योंकि उस समय बहुत से काम पंचांग देखकर ही किए जाते थे। उस समय के पंचांग में हर वो जरूर जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, जो आमजन के लिए जरूरी होती थी। इनमें से कुछ जानकारी आज भी पंचांगों में मिलती है, लेकिन आमजन उसका महत्व नहीं जानते। पंचांग मुख्य रूप से पांच चीजों से मिलकर बना होता है। इसीलिए इसे पंचांग कहते हैं- ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
ये हैं पंचांग के 5 अंग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचाग के 5 मुख्य अंग बताए गए हैं। उनमें सबसे पहले है नक्षत्र, ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र बताए गए हैं। दूसर है करण, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये तिथि का आधा भाग होता है। तीसरा है वार, एक सप्ताह में सात वार होते हैं। चौथा है योग, नक्षत्र की ही तरह योग भी 27 होते हैं। पांचवां और अंतिम है तिथि, एक तिथि 19 से 24 घंटे तक की हो सकती है।
20 जून का पंचांग (Aaj Ka Panchang 20 June 2022)
20 जून 2022, दिन सोमवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। इस दिन सूर्योदय शतभिषा नक्षत्र में होगा, जो सुबह 10.40 तक रहेगा। इसके बाद पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। सोमवार को पहले शतभिषा नक्षत्र होने से अमृत नाम का शुभ योग और उसके बाद पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र होने से मूसल नाम का अशुभ योग इस दिन बन रहा है। इस दिन राहुकाल सुबह 07:26 से 09:07 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
सोमवार चंद्रमा कुंभ में, सूर्य मिथुन राशि में, बुध और शुक्र वृषभ राशि में, राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में, मंगल व गुरु मीन में और शनि कुंभ राशि में रहेंगे। रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दलिया, घी या पान खाकर ही घर से निकलें।
20 जून के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- आषाढ़
पक्ष- कृष्ण
दिन- सोमवार
ऋतु- ग्रीष्म
नक्षत्र- शतभिषा और पूर्वा भाद्रपद
करण- विष्टि और बव
सूर्योदय - 5:45 AM
सूर्यास्त - 7:10 PM
चन्द्रोदय - 12:30 AM
चन्द्रास्त - 12:37 PM
अभिजीत मुहूर्त - 12:01 PM से 12:55 PM
20 जून का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 10:47 AM – 12:28 PM
कुलिक - 2:09 PM – 3:49 PM
दुर्मुहूर्त - 12:55 PM – 01:48 PM और 03:36 PM – 04:29 PM
वर्ज्यम् - 02:22 PM – 04:00 PM
राहु का नक्षत्र है शतभिषा
आकाश मंडल के 27 नक्षत्रों में 27वां है शतभिषा। ये नक्षत्र पंचक के अंतर्गत आता है। ज्योतिश शास्त्र में इसे गुप्त प्रवृत्ति वाला नक्षत्र कहते हैं। इस नक्षत्र के स्वामी राहु है, जो कि एक छाया ग्रह है और इसकी राशि कुंभ है, यानि इसके चारों चरण कुंभ राशि में ही आते हैं। इस नक्षत्र में जन्में लोग बहुत साहसी और मजबूत विचारों वाले होते है, ये आसानी से किसी से प्रभावित नहीं होते। ये लोग धर्म के प्रति निष्ठावान होते हैं। दर्शन, चिकित्सा, मनोविज्ञान एवं ज्योतिष विषयों में इनकी खासी रूचि होती है।
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