
उज्जैन. पंचांग को भारतवर्ष की ज्योतिष विधा का दर्पण कहा जाता है, जिससे समय की विभिन्न इकाइयों जैसे महीना, पक्ष, तिथि, दिन आदि के बारे में जाना जा सकता है। धार्मिक व सभी प्रकार शादी, मुण्डन, भवन निर्माण आदि तिथियों के समय पर अनुष्ठान का ज्ञान पंचांग द्वारा लगाया जा सकता है। प्राचीन काल से ही पंचांग के विशेष पांच अंग माने गए हैं- वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। इन सभी को जोड़कर दैनिक पंचांग का निर्माण किया जाता है। इसमें पूरे दिन के शुभ मुहूर्त आदि की जानकारी भी मिलती है। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
22 जुलाई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 22 July 2022)
22 जुलाई 2022, दिन शुक्रवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह लगभग 09.32 तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन सूर्योदय भरणी नक्षत्र में उदय होगा, जो शाम 04.25 तक रहेगा, इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। शुक्रवार को पहले भरणी नक्षत्र होने से मुद्गर नाम का अशुभ योग और इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र होने से छत्र नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। इनके अलावा शूल और गंड नाम के 2 अन्य अशुभ योग भी इस दिन बन रहे हैं। इस दिन राहुकाल सुबह 10:54 से दोपहर 12:33 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
शुक्रवार की रात को चंद्रमा मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन सूर्य-बुध कर्क राशि में, शुक्र मिथुन राशि में, शनि मकर राशि (वक्री), मंगल-राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में और गुरु (वक्री) मीन राशि में रहेंगे। शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। अगर यात्रा करना जरूरी हो तो जौ या राईं खाकर घर से बाहर निकलें।
22 जुलाई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- श्रावण
पक्ष- कृष्ण
दिन- शुक्रवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- भरणी और कृत्तिका
करण- गर और वणिज
सूर्योदय - 5:57 AM
सूर्यास्त - 7:09 PM
चन्द्रोदय - Jul 22 12:45 AM
चन्द्रास्त - Jul 22 2:06 PM
अभिजीत मुहूर्त - 12:06 PM – 12:59 PM
22 जुलाई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 3:51 PM – 5:30 PM
कुलिक - 7:36 AM – 9:15 AM
दुर्मुहूर्त - 08:35 AM – 09:28 AM और 12:59 PM – 01:52 PM
वर्ज्यम् - 05:44 AM – 07:30 AM
वारीयन योग (variyan Yoga)
ज्योतिष शास्त्र में 27 शुभ-अशुभ योगों के बारे में बताया गया है। ये पंचांग के 5 अंगों में से एक है। इनमें से अठाहवें योग का नाम वारीयन है। इस योग के दौरान कोई मंगलदायक कार्य करने से उसमे निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है। जिस व्यक्ति का जन्म वारीयन योग में होता है वह मनुष्य संगीत, नृत्य एवं कला के विभिन्न क्षेत्रों में रूचि रखता है अगर ये इन क्षेत्रों में प्रयास करें तो इन्हें बहुत जल्दी कामयाबी मिलती है।
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