
उज्जैन. भारतीय गणना पद्धति के अनुसार सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। हमारे देश में लगभग 30 प्रकार के पंचांग प्रचलित हैं। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण, इन पांच अंगों के योग से पंचांग बनता है। जिन ग्रंथों से हमारे पंचांग बनते हैं वे कम से कम 500 वर्ष पुराने हैं। पंचांग में महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, एक हिंदू वर्ष में 12 महीने होते हैं। इनका क्रम इस प्रकार है- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भादौ, आश्विन, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ, फाल्गुन। प्रत्येक महीन दो पखवाड़ों में बंटा होता है, जिसे पक्ष कहते हैं कृष्ण और शुक्ल। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
31 मई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 31 May 2022)
31 मई 2022, दिन मंगलवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी। इस दिन सूर्योदय रोहिणी नक्षत्र में होगा, जो सुबह 10 बजे तक रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। मंगलवार को पहले रोहिणी नक्षत्र होने से मातंग नाम का शुभ योग और उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र होने से राक्षस नाम का अशुभ योग इस दिन बन रहा है। इस दिन राहुकाल दोपहर 03:44 से शाम 05:24 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
मंगलवार को चंद्रमा वृष राशि से निकलकर मिथुन में प्रवेश करेगा। सूर्य और बुध ग्रह वृषभ राशि में रहेंगे। राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में, मंगल, गुरु और शु्क्र मीन में, शनि कुंभ राशि में रहेंगे। मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि निकलना पड़े तो गुड़ खाकर यात्रा पर जाना चाहिए।
31 मई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रमी संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- ज्येष्ठ
पक्ष- शुक्ल
दिन- मंगलवार
ऋतु- ग्रीष्म
नक्षत्र- रोहिणी और मृगशिरा
करण- किस्तुघन और बव
सूर्योदय - 5:45 AM
सूर्यास्त - 7:04 PM
चन्द्रोदय - May 31 6:03 AM
चन्द्रास्त - May 31 8:04 PM
अभिजीत मुहूर्त - 11:57 AM : 12:51 PM
31 मई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 09:04 AM – 10:44 AM
कुलिक - 12:24 PM – 02:04 PM
दुर्मुहूर्त - 08:24 AM – 09:18 AM और 11:20 PM – 12:03 AM
वर्ज्यम् - 04:19 PM – 06:07 PM
आज से ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष होगा शुरू
31 मई से ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो 14 जून तक रहेगा। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना है। इस महीने का महत्व कई धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इसके शुक्ल पक्ष में कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें महेश नवमी, गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी आदि प्रमुख हैं। इस महीने के अंतिम दिन चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने का नाम ज्येष्ठ है। इस महीने से जुड़े कई नियम और परंपराएं धर्म ग्रंथों में बताई गई है।
आकाश मंडल का पांचवां नक्षत्र में मृगशिरा
ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं। इनमें से पांचवां नक्षत्र है मृगशिरा। मृगशिरा का अर्थ है मृग यानी हिरन का शीष। यह सबसे महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है। आकाश में यह हिरण के सिर के आकार का नजर आता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मृगशिरा नक्षत्र का अधिपति ग्रह मंगल ग्रह है। जैसे हिरण हमेशा संवेदनशील, चिंतित और शंकालु होते हैं, वैसे ही मृगशिरा नक्षत्र के लोग भी होते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे लोग सुंदर होते हैं। इन्हें अपने जीवन में सभी तरह के सुख प्राप्त होते हैं। ऐसे लोग अपने काम में दक्ष, संगीत-प्रेमी, सफल व्यवसायी, परोपकारी और नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं।
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