
उज्जैन. पंचांग के अनुसार, वर्तमान कल्प का नाम श्वेतवाराहकल्प हैं। वर्तमान सातवें वैवस्वत मन्वन्तर के 27 चतुर्युग बीत चुके हैं व इस समय 28 वे चतुर्युग में सत्य, त्रेता, द्वापर युग के बीतने के बाद कलियुग का संध्याकाल चल रहा है। इसी तरह पंचांग के माध्मय से दिन भर के शुभ मुहूर्त, ग्रहों-नक्षत्रओं की स्थिति पर विचार किया जाता है। पंचांग को हिंदू कैलेंडर भी कहा जा सकता है। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
आज करें राधा जन्माष्टमी का व्रत
धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण की प्रेयसी श्रीराधा की विशेष पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर राधाजी का जन्म हुआ था। मथुरा, वृंदावन और बरसाना के आस-पास के क्षेत्रों में ये पर्व बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। ये व्रत करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में निवास करती है।
4 सितंबर का पंचांग (Aaj Ka Panchang 4 september 2022)
4 सितंबर 2022, दिन रविवार को भाद्रमास मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह
10:40 तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो रात अंत तक रहेगी। इस दिन राधा जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। रविवार को सूर्योदय ज्येष्ठा नक्षत्र में होगा, जो दिन भर रहेगा। रविवार को ज्येष्ठा नक्षत्र होने से काण नाम का अशुभ योग दिन भर रहेगा। इसके अलावा विषकुंभ और प्रीति नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन रहेंगे। राहुकाल शाम 05:05 से 06:38 तक रहेगा।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी...
रविवार को चंद्रमा वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करेगा। शुक्र और सूर्य सिंह राशि में, बुध कन्या राशि में, मंगल वृष राशि में, शनि मकर राशि में (वक्री), राहु मेष राशि में, गुरु मीन राशि में (वक्री) और केतु तुला राशि में रहेंगे। रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दलिया, घी या पान खाकर ही घर से निकलें।
4 सितंबर के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- भादौ
पक्ष- शुक्ल
दिन- रविवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- ज्येष्ठा
करण- बव और बालव
सूर्योदय - 6:13 AM
सूर्यास्त - 6:38 PM
चन्द्रोदय - Sep 04 1:34 PM
चन्द्रास्त - Sep 05 12:22 AM
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 से 12:50 तक
4 सितंबर का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 12:25 PM – 1:58 PM
कुलिक - 3:31 PM – 5:05 PM
दुर्मुहूर्त - 04:58 PM – 05:48 PM
वर्ज्यम् - 06:36 PM – 08:05 PM
देवी पार्वती को समर्पित है तृतीया तिथि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कृष्ण और शुक्ल पक्ष मिलाकर कुल 16 तिथियां होती हैं। इनमें से 1 से लेकर 14 तक की तिथियां समान होती हैं। इनमें से तीसरी तिथि को तृतीया कहते हैं। इस तिथि की स्वामिनी देवी गौरी हैं। इस तिथि को जया तिथि यानी शुभ तिथि माना गया है। अपने नाम के अनुरुप ये तिथि कार्यों में विजय प्रदान कराने वाली होती है। इस तिथि में कोर्ट-कचहरी के मामले निपटाना, शस्त्र खरीदना, वाहन खरीदना जैसे काम करना अच्छा माना जाता है।
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