Aaj Ka Panchang 5 मई 2022 का पंचांग: आज पूरे दिन रहेगा काण नाम का अशुभ योग, राहुकाल में न करें शुभ काम

Published : May 05, 2022, 05:30 AM IST
Aaj Ka Panchang 5 मई 2022 का पंचांग: आज पूरे दिन रहेगा काण नाम का अशुभ योग, राहुकाल में न करें शुभ काम

सार

5 मई, गुरुवार को चंद्रमा मिथुन राशि में, शनि कुंभ राशि में, सूर्य और राहु मेष राशि में, शुक्र और गुरु मीन राशि में, बुध ग्रह वृषभ राशि में, केतु तुला राशि में और मंगल कुंभ राशि में रहेगा।  

उज्जैन. शुभ मुहूर्त देखने के लिए ज्योतिषी और पंडित सभी पंचांग का ही सहारा लेते हैं। पंचांग में पूरे साल के शुभ मुहूर्त, तिथियां, व्रत-त्यौहार आदि की जानकारी आसानी से मिल जाती है। पंचांग वैदिक काल से ही सनातन धर्म में काल गणना का एक प्रमुख अंग रहा है। अगर कहा जाए कि पंचांग एक प्राचीन हिंदू कैलेंडर है तो गलत नहीं होगा। वैसे तो हमारे देश में कई तरह के पंचांग प्रचलित हैं। इनमें से विक्रम पंचांग सबसे प्रमुख है। वेद, पुराण और अन्य ग्रंथों में सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी व अन्य ग्रहों के साथ ही और नक्षत्र आदि की स्थिति, दूरी और गति के बारे में बताया गया है। स्थिति, दूरी और गति के मान से ही पृथ्वी पर होने वाले दिन-रात और अन्य संधिकाल को विभाजित कर एक पूर्ण सटीक पंचांग बनाया जाता है।

कैसे तैयार होता है पंचांग - पंचांग मुख्य रूप से 5 अंगों से मिलकर बना होता है। ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। जानिए इन पांच से जुड़ी खास बातें…

करण: तिथि का आधा भाग करण कहलाता है। चन्द्रमा जब 6 अंश पूर्ण कर लेता है तब एक करण पूर्ण होता है। कुल 11 करण होते हैं- बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। 

तिथि: चन्द्र रेखांक को सूर्य रेखांक से 12 अंश ऊपर जाने के लिए जो समय लगता है, वह तिथि कहलाती है। तिथि कुल 16 होती है प्रतिपदा से चतुर्दशी तक 14 और पूर्णिमा व अमावस्या।

नक्षत्र: आकाश मंडल में एक तारा समूह को नक्षत्र कहा जाता है। इसमें 27 नक्षत्र होते हैं और नौ ग्रहों को इन नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है।

वार: पंचांग के अनुसार, एक सप्ताह में सात वार होते हैं। इनके नाम इस प्रकार हैं- सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।

योग: नक्षत्र की ही तरह योग भी 27 प्रकार के होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य-चंद्र की दूरियों की स्थितियों को योग कहा जाता है।

5 मई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 5 May 2022)
5 मई 2022, दिन गुरुवार को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन सूर्योदय आर्द्रा नक्षत्र में होगा। यह पूरे दिन रहेगा। गुरुवार को आर्द्रा नक्षत्र होने से कारण नाम का अशुभ योग इस दिन बन रहा है। इस दिन दोपहर 2:00 से 03:38 तक राहुकाल रहेगा। शुभ काम करने से बचें।

ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
5 मई, गुरुवार को चंद्रमा मिथुन राशि में, शनि कुंभ राशि में, सूर्य और राहु मेष राशि में, शुक्र और गुरु मीन राशि में, बुध ग्रह वृषभ राशि में, केतु तुला राशि में और मंगल कुंभ राशि में रहेगा। गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा ना करें। इस दिन अगर जरूरत पड़ने पर दक्षिण दिशा में निकलना पड़े तो दही या जीरा मुंह में डाल कर निकलें।

5 मई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रमी संवत: 2079
मास पूर्णिमांत: वैशाख
पक्ष: शुक्ल
दिन: गुरुवार
ऋतु: ग्रीष्म
तिथि: चतुर्थी – सुबह 10 बजे तक, इसके बाद पंचमी
नक्षत्र: आर्द्रा
करण: बव
सूर्योदय - 5:55 AM
सूर्यास्त - 6:52 PM
चन्द्रोदय- 8:54 AM
चन्द्रास्त -11:03 PM
अभिजीत मुहूर्त:  11:57 AM से 12:49 PM

5 मई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 5:55 AM – 7:32 AM
कुलिक - 9:09 AM – 10:46 AM
दुर्मुहूर्त - 10:14 AM – 11:05 AM और 03:24 PM – 04:16 PM
वर्ज्यम् - 03:45 PM – 05:33 PM

इस समय चल रहा है राक्षस संवत्सर
पंचांग के अनुसार, वर्तमान कल्प का नाम श्वेतवाराहकल्प हैं। वर्तमान सातवें वैवस्वत मन्वन्तर के 27 चतुर्युग बीत चुके हैं व इस समय 28 वे चतुर्युग में सत्य, त्रेता, द्वापर युग के बीतने के बाद कलियुग का संध्याकाल चल रहा है। विक्रम संवंत् 2079 तक कलियुग के 5124 वर्ष बीत चुके हैं। कलियुग के आरंभ में 36000 वर्ष संध्याकाल का मान होता है। इस हिसाब से अभी कलियुग की संध्या के ही 30876 सौर वर्ष बीतने बाकी हैं। पंचांग के अनुसार इस समय राक्षस संवत्सर चल रहा है जो शिवविंशति के अंतर्गत नवम संवत्सर है। दशम इन्द्राग्नि युग में इसकी गणना चौथी है। इसके स्वामी इन्द्राग्नि और अधिष्ठातृ बृहस्पति देवता इसकी राशि व तुला व स्वामी श्री शुक्र हैं।

कैसे करते हैं कालगणना?
पंचांग के अनुसार, 2 नाड़िका=1  मुहूर्त। दिन व रात के घटने-बढ़ने के अनुसार 6 या 7 नाड़िका= 1 प्रहर या याम। दिन अथवा रात के चौथे भाग को प्रहर कहते हैं। 15 दिन रात का 1 पक्ष। पक्ष के 2 भेद होते हैं- शुक्ल और कृष्ण। 2 पक्ष मिलाकर 1 मास होता है जो पितरों का दिन रात है। 2 मास की 1 ऋतु और 6 मास का 1 अयन होता है। अयन दक्षिणायन और उत्तरायन दो प्रकार का होता है। ये दोनों अयन मिलकर देवताओं के 1 दिन-रात होते हैं तथा मनुष्य लोक में ये 1 वर्ष या 12 महीने होते हैं।
 

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