
उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, कई बार कुंडली में विशेष योगों के कारण कालसर्प योग शुभ फल भी प्रदान करता है। ये योग इस प्रकार हैं-
1. यदि किसी की कुंडली में सूर्य कालसर्प के मुख में स्थित है अर्थात राहु के साथ स्थित हो तथा 1, 2, 3, 10 अथवा 12 वें स्थान में हो एवं शुभ राशि और शुभ प्रभाव में हो तो प्रतिष्ठा दिलवाता है। व्यक्ति की हेल्थ अच्छी रहती है। वह राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में प्रसिद्धि प्राप्त करता है।
2. किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प के मुख में चंद्रमा शुभ स्थिति और प्रभाव में हो तो वह समझदार और उच्च विचारधारा वाला बनाता है।
3. यदि व्यक्ति की कुंडली में मंगल कालसर्प के मुख में स्थित हो तो इसकी शुभ एवं बली स्थिति जातक को पराक्रमी और साहसी तथा व्यवहार कुशल बनाती है। वह हमेशा कामयाब होता है।
4. बुध यदि कालसर्प के मुख में स्थित हो तथा शुभ स्थिति और प्रभाव में हो तो ऐसे व्यक्ति को उच्च शिक्षा मिलती है तथा वह बहुत उन्नति भी करता है।
5. राहु के साथ गुरु की युति गुरु-चांडाल योग बनाती है। ज्योतिष में इसे अशुभ माना जाता है। लेकिन अगर यह योग शुभ स्थिति और शुभ प्रभाव में हो तो ऐसे लोगों को अच्छी प्रगति मिलती है।
6. कालसर्प के मुख में स्थित शुक्र शुभ स्थिति और प्रभाव में होने पर पूर्ण स्त्री सुख प्रदान करता है। दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है।
7. यदि कालसर्प के मुख में शनि शुभ स्थिति हो तो ऐसा व्यक्ति समझदार और तेज बुद्धि वाला होता है।
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