Maghi Purnima 2022: 16 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर बन रहे हैं ग्रहों के शुभ योग, ये उपाय करने से होगा फायदा

Published : Feb 15, 2022, 08:52 AM IST
Maghi Purnima 2022: 16 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर बन रहे हैं ग्रहों के शुभ योग, ये उपाय करने से होगा फायदा

सार

धर्म ग्रंथों में माघ मास की पूर्णिमा (Maghi Purnima 2022) का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार ये पूर्णिमा 16 फरवरी, बुधवार को है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस तिथि के स्वामी चंद्र देव हैं। चंद्र व्यापार और धन का कारक ग्रह है।

उज्जैन. इस माघ पूर्णिमा (Maghi Purnima 2022) पर चंद्रोदय के समय चंद्र अपने मित्र सूर्य की सिंह राशि में रहेगा। चंद्र मघा नक्षत्र में और सूर्य कुंभ राशि में और धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। सूर्य और गुरु की पूर्ण दृष्टि चंद्रमा पर होगी। सूर्य और चंद्र की वजह से व्यापारियों के लिए समय अच्छा रहेगा। व्यापार में वृद्धि हो सकती है। इस तिथि पर स्नान-दान करने का भी विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है।

माघ पूर्णिमा पर कल्पवास की परंपरा
तीर्थराज प्रयाग में श्रद्धालु एक मास तक कल्पवास करते हैं। माघ पूर्णिमा पर कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं को अक्षय पुण्य मिलता है। इस पूर्णिमा सभी कल्पवासी गंगा नदी की आरती और पूजा करते हैं। साधु-संन्यासियों, ब्राह्मणों, जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जाता है। माघ पूर्णिमा पर कल्पवास करने वाले लोग देवी गंगा से फिर बुलाने की प्रार्थना करके कल्पवास खत्म करते हैं और अपने-अपने घर लौट जाते हैं।

माघ पूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व
इस पूर्णिमा का धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी है। हेमंत ऋतु खत्म होती है और इस दिन से शिशिर ऋतु शुरू होती है। शीत ऋतु खत्म होकर ग्रीष्म ऋतु शुरु होने लगती है। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसलिए इस पूर्णिमा पर संयम से रहना, सुबह जल्दी स्नान करना और व्रत दान करना चाहिए।

पूर्णिमा पर कर सकते हैं ये काम भी
1.
पूर्णिमा भगवान सत्यनारायण की कथा भी करनी चाहिए। इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु, लक्ष्मी, बालकृष्ण की पूजा करें। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, ऊँ महालक्ष्म्यै नम:, कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
2. इस तिथि पर पितरों के लिए धूप ध्यान जरूर करें। किसी नदी में तर्पण करें। जरूरतमंद लोगों को खाना और धन दान करें। नए वस्त्र, कंबल, गुड़, फल आदि चीजों का दान भी करें।
3. किसी मंदिर में शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल और चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं। बिल्व पत्र, धतूरा, हार-फूल सहित अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। धूप-दीप जलाएं।
4. हनुमानजी के सामने धूप-दीप जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास पर्याप्त समय है तो सुंदरकांड का पाठ करें।
5. गाय का हरा चारा खिलाएं, मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर नदी या तालाब में डालें।

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