25 मार्च, बुधवार से विक्रम संवत 2077 शुरू हो चुका है। इसका नाम प्रमादी है। इससे पहले परिधावी नाम का संवत् था। इसके पहले सन् 1780, 1840, 1900 और 1960 में भी परिधावी संवत् था।
उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार कोई संवत् करीब 60 साल में एक बार आता है। पिछले सालों में जब-जब परिधावी संवत् आया है, तब-तब देश-दुनिया में संक्रामक रोग जैसे कोरोनावायरस का प्रभाव अधिक हुआ है। जानिए इससे जुड़ी खास बातें-
पं. शर्मा के अनुसार, 1780 के बाद से हर 60 साल में 1780, 1840, 1900, 1960 और 2019 ये परिधावी संवत् आया है और जब-जब ये संवत् आया तब-तब पोलियो, दिमागी बुखार, हैजा जैसे संक्रामक रोग फैले।
इस बार यानी 2019-20 में कोरोनावायरस फैला है। इस परिधावी संवत के राजा शनि और सूर्य मंत्री थे। ये दोनों ही एक दूसरे के शत्रु हैं। बीमारी फैलने की एक वजह शनि और सूर्य की शत्रुता भी है।
संक्रामक बीमारियां तो पुराने समय से ही हैं, लेकिन परिधावी संवत् के समय ये बीमारियां महामारी बनी और बहुत बड़े वर्ग को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
बाद में इन बीमारियों की दवाइयां बन गई और इन्हें काबू कर लिया गया, लेकिन इन्हें खत्म नहीं किया जा सका है।
कोरोनावायरस भी पहले से ही है, लेकिन वर्तमान में इस बीमारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है।
जल्दी ही इसकी दवाइयां भी बन जाएंगी, जिससे रोगी ठीक हो जाएंगे, लेकिन इसके बाद भी ये बीमारी पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाएगी।
25 मार्च, बुधवार से शुरू हुए नववर्ष के राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। इस नव संवत् के स्वामी अश्विनी कुमार हैं, जो देवताओं के वैद्य हैं। अश्विनी कुमार की वजह से संक्रामक रोगों की रोकथाम हो सकती है।
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