
Cooking Dal at Home Avoid These 5 Mistakes: घर की दाल चाहे अरहर हो, मूंग हो या उड़द, उसमें सादगी और हेल्दी फ्लेवर जरूर मिलता है, लेकिन अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि घर की दाल में वो गाढ़ापन, खुशबू और स्वाद क्यों नहीं आता जो रेस्तरां की दाल में आता है। असल में, इसका कारण रेसिपी में बड़ी गलतियां नहीं बल्कि कुछ छोटी-छोटी चूक होती हैं, जो दाल के पूरे स्वाद को फीका कर देती हैं। आज हम आपको दाल बनाने की रेसिपी या टिप्स नहीं बताएं, आज हम आपको कुछ बेसिक और छोटी गलतियां बताएंगे, जिससे न करने से अगली बार दाल गलेगी भी और खाने पर लगेगी रेस्तरां जैसी स्वादिष्ट।
अक्सर हम दाल को बिना भिगोए ही प्रेशर कुकर में डाल देते हैं। इससे दाल पक तो जाती है लेकिन उसका टेक्सचर मुलायम नहीं बन पाता। रेस्तरां में दाल हमेशा कुछ घंटों पहले भिगोई जाती है, ताकि दाने फुलकर अच्छे से गल जाए और उसमें एक क्रीमी टेक्सचर आ सके।
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दाल बनाने में सबसे अहम होता है तड़का। कई बार लोग पहले ही सभी मसाले दाल में डाल देते हैं, जबकि असली स्वाद तभी आता है जब जीरा, लहसुन, अदरक और प्याज को धीमी आंच पर सुनहरा करके तड़का लगाया जाए। अगर मसाले कच्चे रह गए या जल गए तो पूरी दाल का स्वाद बिगड़ सकता है।
रेस्तरां की दाल की सबसे खास बात है उसकी क्रीमीनेस। घर में अक्सर लोग सिर्फ घी या तेल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि मक्खन और थोड़ी-सी क्रीम डालने से दाल का फ्लेवर दोगुना हो जाता है। ये न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है बल्कि दाल को गाढ़ा और रिच बनाता है।
कई बार जल्दबाजी में लोग नमक शुरुआत में ही ज्यादा डाल देते हैं, जिससे दाल सख्त रह जाती है। नमक हमेशा दाल के पक जाने के बाद डालना बेहतर रहता है। इसके अलावा पानी की सही मात्रा भी जरूरी है। कम पानी से दाल गाढ़ी होकर चिपचिपी लगेगी और ज्यादा पानी से उसका फ्लेवर हल्का और पतला हो जाएगा।
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रेस्तरां में दाल को सिर्फ प्रेशर कुकर में पकाकर छोड़ नहीं दिया जाता, बल्कि उसे धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाया जाता है। इस स्लो-कुकिंग से मसालों का फ्लेवर दाल में अच्छी तरह मिल जाता है और खाने पर हर निवाला स्वादिष्ट लगता है।