
Chhath Puja Rituals: छठ पूजा के चार दिन के पर्व में दूसरा दिन खरना कहलाता है। इसे बहुत पवित्र और नियमों वाला दिन माना जाता है। इस दिन व्रती पूरा दिन निर्जला उपवास रखते हैं यानी वे न तो खाना खाते हैं और न ही पानी पीते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद पूजा करके प्रसाद ग्रहण किया जाता है। जिसे खरना प्रसाद कहते हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने के लिए वो लोग भी आते हैं, जिनके घर छठ नहीं होता है। तो चलिए बताते हैं, खरना के दिन प्रसाद में क्या-क्या बनता है।
खरना के दिन का प्रसाद बहुत सादा लेकिन बेहद पवित्र होता है। गुड़ का खीर (रसीया) बनाया जाता है। प्योर दूध में बिना पानी के इस खीर को बनाया जाता है। नए साल के फसल का निकला चावल यूज होता है। मिट्टी या पीतल के बर्तन में खीर बनाया जाता है।
रोटी (पूरा) – गेहूं के आटे से रोटी बनाई जाती है। कई घरों आटा खुद पीसा जाता है। क्योंकि आटे की प्योरिटी का भी ध्यान रखना होता है। घी में सेक कर इस रोटी को बनाया जाता है।
व्रती प्रसाद बनाने के बाद छठी मईया की पूजा अर्चना करते हैं। फल और पान-सुपारी के साथ खीर और रोटी चढ़ाई जाती है। फिर तुलसी का पत्ता प्रसाद में डालकर भोग लगाया जाता है। इसके बाद व्रती रोटी और खीर खाकर खरना करती हैं।
व्रती जब खरना करते हैं, तो उस दौरान उनके कानों तक किसी की आवाज नहीं जानी चाहिए। इसलिए जब तक वे प्रसाद ग्रहण नहीं कर लेते, घर में कोई बोलता नहीं है। व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही बाकी घरवाले खीर और रोटी का प्रसाद खाते हैं। जिनके घर छठ पूजा नहीं होती, उन्हें यह प्रसाद दिया जाता है या फिर उन्हें बुलाकर खिलाया जाता है।
खरना के बाद से फिर 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है। अर्घ्य देने के बाद यह समाप्त होता है। छठ पूजा आत्मसंयम, पवित्रता और श्रद्धा का प्रतीक होता है।
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