
घर में अंडे का सेवन होता है और अब छिलकों को अक्सर कूड़े में फेंक देते हैं तो जरा ठहर जाइए। यही बेकार समझे जाने वाले छिलके आपके गमले में लगे पौधों के बेहद काम आ सकते हैं। अंडों के छिलकों में मौजूद कैल्शियम मिट्टी के लिए उपयोगी होता है, जरूरत है तो बस सही तरीके से इस्तेमाल करने की। हालांकि, इन्हें गमले में डालना जितना आसान लगता है, उतना ही जरूरी है यह जानना कि कौन से पौधों में अंडे के छिलके डालने चाहिए, कितनी मात्र में इस्तेमाल करना चाहिए और किन पौधों में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर आप भी घर के किचन वेस्ट को स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो अंडे के छिलकों से जुड़ी ये बातें जरूर जान लें।
अंडे के छिलकों में कैल्शियम कार्बोनेट होता है, जो धीरे-धीरे टूटने के दौरान मिट्टी में कैल्शियम उपलब्ध करा सकता है।
छिलकों को फेंकने के बजाय दोबारा इस्तेमाल करने से घर के जैविक कचरे को कम करने में मदद मिलती है।
बारीक पिसे छिलके समय के साथ मिट्टी में टूटते हैं। इसलिए इन्हें तुरंत असर करने वाली खाद के बजाय धीमे काम करने वाले पूरक की तरह देखा जाना चाहिए।
अगर मिट्टी में पहले से पर्याप्त कैल्शियम मौजूद है, तो अतिरिक्त छिलके डालने से खास फायदा नहीं मिलेगा।
अंडे के छिलकों में मौजूद कैल्शियम कार्बोनेट मिट्टी की अम्लता को कम करने में योगदान दे सकता है। इसलिए ऐसे पौधों में इनका ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिन्हें अम्लीय मिट्टी पसंद होती है।
छिलके धीरे-धीरे टूटते हैं। इसलिए इन्हें डालने के बाद पौधे की ग्रोथ तुरंत बढ़ने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
अगर छिलकों पर अंडे के अवशेष लगे हों और उन्हें सीधे गमले में डाल दिया जाए, तो बदबू या कीटों की परेशानी हो सकती है।
ब्लूबेरी, अजलिया, गार्डेनिया और कैमेलिया जैसे अम्लीय मिट्टी पसंद करने वाले पौधों में अंडे के छिलकों का ज्यादा इस्तेमाल न करें, क्योंकि छिलके मिट्टी की अम्लता को कम करने की दिशा में काम कर सकते हैं।
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