
रिलेशनशिप डेस्क. महिलाओं के साथ हिंसा और भेदभाव को लेकर खबरें तो पूरी दुनिया से सामने आती रहती हैं। लेकिन अफगानिस्तान एक ऐसा देश है जहां पर उनकी स्थिति काफी खराब है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (international womens day 2023) पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने इस बात को स्वीकार किया। यूने ने बताया अफगानिस्तान की महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। यह मुल्क महिलाओं एवं लड़कियों के लिए दुनिया का सबसे दमनकारी देश बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यूएन ने इस संबंध में रिपोर्ट जारी किया है। यूएन ने कहा कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से देश महिलाओं और लड़कियों के लिए दुनिया में सबसे अधिक अत्याचारी देश बन गया है।अफगानिस्तान के नए शासकों ने उन नियमों को लागू करने पर एकमात्र ध्यान केंद्रित किया है जो ज्यादातर महिलाओं और लड़कियों को प्रभावी ढंग से उनके घरों में फंसा देते हैं। बता दें कि दो दशकों के युद्ध के बाद अमेरिका और नाटो सेना अफगानिस्तान से चली गई और इस देश पर तालिबान ने फिर से कब्जा कर लिया।
महिलाओं को अकेले घूमना मना
यूएन ने बताया कि वहां पर लड़कियों को छठी कक्षा के आगे शिक्षा पर प्रतिबंधित कर दिया गया। महिलाओं को काम करने , अध्ययन करने, पुरुष साथी के बिना यात्रा करने और यहां तक कि पार्कों या स्नानघरों में जाने पर भी रोक लगा दी जाती है। महिलाओं को भी खुद को सिर से पैर तक ढंकना चाहिए और मानवीय सहायता के वितरण को बाधित करते हुए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों में काम करने से रोक दिया जाता है।
तालिबान ने तोड़ा वादा
संयुक्त राष्ट्र के बयान की मानें तो अगस्त 2001 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबान ने उदारवादी रुख अपनाने का वादा किया था। लेकिन उसने अपना वादा तोड़ दिया और कठोर नियम लागू किए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि और अफगानिस्तान में मिशन की प्रमुख रोजा ओटुनबायेवा ने बताया कि अफगान महिलाओं और लड़कियों पर पाबंदी को देखकर काफी दुख होता है। महिलाओं को लेकर वहां पर कई कानून लागू किए गए हैं। जिनका विरोध भी देखने को मिल रहा है।
तालिबान लिंग के आधार पर कर रहा है भेदभाव
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि तालिबान देश को एकजुट करने का दावा करता है, लेकिन उन्होंने इसे लिंग के आधार पर गंभीर रूप से विभाजित भी किया है। तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि यह लिंग अलगाव एक महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है और इसे संबोधित किया जा रहा है, उन्हें अन्य उपलब्धियों पर आंका जाना चाहिए।
तालिबान नहीं हट रहा पीछे
शिक्षा पर महिलाओं के बैन लगाए जाने के बारे में तालिबान सरकार ने अपनी सफाई में कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाए जा रहे कुछ विषय इस्लामी मूल्यों और अफगान के अनुरूप नहीं थे। तालिबान की अंतरराष्ट्रीय निंदा होने के बाद भी वो पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं।
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