
पालतू और जंगली जानवरों में कैंसर आम है, लेकिन यह हैरानी की बात है कि कुछ विशाल जानवरों में यह क्यों नहीं फैलता। इंसानों से लाखों गुना ज़्यादा कोशिकाएं होने के बावजूद, व्हेल और हाथियों में कैंसर बहुत कम होता है। इस घटना को 'पीटोज़ पैराडॉक्स' के नाम से जाना जाता है। लंबी उम्र वाले इन विशाल जानवरों में डीएनए की मरम्मत, ट्यूमर को दबाने और इम्यूनिटी का विकास कैसे हुआ, यह इंसानी कैंसर रिसर्च को नई दिशा देता है।
आम तौर पर माना जाता है कि जिस जीव में जितनी ज़्यादा कोशिकाएं होती हैं, उसे कैंसर का खतरा उतना ही ज़्यादा होता है। लेकिन व्हेल और हाथी जैसे बड़े जानवरों में कैंसर दुर्लभ है। इसी विरोधाभास को 'पीटोज़ पैराडॉक्स' कहते हैं, यानी शरीर का आकार और उम्र बढ़ने पर भी कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता। 1977 में वैज्ञानिक रिचर्ड पीटो ने इस पर ध्यान दिलाया था। हाथियों में कैंसर रोकने वाले TP53 जीन की कई कॉपियां पाई गई हैं। वहीं, व्हेल अपने मज़बूत डीएनए रिपेयर सिस्टम की वजह से कैंसर के बिना लंबी ज़िंदगी जीती हैं। डीएनए की मरम्मत के ये रहस्य कैंसर रिसर्च के लिए बहुत ज़रूरी हैं। हाल ही में नेचर जर्नल में छपी एक स्टडी रिपोर्ट काफी उम्मीद जगाती है।
200 से ज़्यादा साल तक जीने वाली बोहेड व्हेल (Bowhead whales) इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं। इनकी कोशिकाएं डीएनए में होने वाले नुकसान, खासकर 'डबल-स्ट्रैंड ब्रेक' को बहुत सटीकता से ठीक करती हैं। इसमें CIRBP नाम का प्रोटीन अहम भूमिका निभाता है, जो इंसानों और व्हेल दोनों में पाया जाता है। लेकिन व्हेल में यह प्रोटीन ज़्यादा असरदार होता है। यह खराब डीएनए के हिस्सों को बहुत सही तरीके से जोड़ने में मदद करता है। जब वैज्ञानिकों ने इस व्हेल प्रोटीन को इंसानी कोशिकाओं पर आज़माया, तो पाया कि वे कोशिकाएं भी डीएनए की मरम्मत ज़्यादा सटीकता से करने लगीं।
व्हेल का कैंसर से बचाव सिर्फ एक प्रोटीन तक सीमित नहीं है। हंपबैक व्हेल के जेनेटिक स्ट्रक्चर की जांच करने पर शरीर की बनावट, इम्यूनिटी, सेल ग्रोथ और मृत कोशिकाओं से जुड़े जीन्स में बड़े विकासवादी बदलाव पाए गए। हंपबैक व्हेल में ऐसे कई जीन्स की कई कॉपियां होती हैं, जो खराब या अस्वस्थ कोशिकाओं को पहचानने और हटाने में मदद करती हैं। ये जीन्स व्हेल को खराब कोशिकाओं के कैंसर बनने से पहले ही उन्हें खत्म करने की खास क्षमता देते हैं। इसी वजह से, उनके शरीर में जेनेटिक बदलाव बहुत धीरे-धीरे होते हैं।
विशाल जानवरों की ये रक्षा रणनीतियाँ इंसानों के कैंसर इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। व्हेल के CIRBP प्रोटीन जैसी दवाएं विकसित करने से कोशिकाओं की मरम्मत में मदद मिल सकती है। अगर व्हेल की तरह कोशिकाओं की सुरक्षा करते हुए शरीर के डीएनए रिपेयरिंग मैकेनिज्म को मज़बूत किया जा सके, तो कैंसर की संभावना को शुरुआत में ही रोका जा सकता है और शायद भविष्य में कैंसर का डर खत्म हो जाए।
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