
अस्पताल से डिस्चार्ज मिलने की खबर किसी भी मरीज और उसके परिवार के लिए राहत लेकर आती है। लेकिन कई बार इसी समय एक और चिंता हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम अप्रूवल की शुरू हो जाती है। खासतौर पर कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले लोग उम्मीद करते हैं कि डॉक्टर के डिस्चार्ज लिखते ही क्लेम तुरंत मंजूर हो जाएगा। हालांकि रियलिटी यह है कि इंश्योरेंस कंपनी और अस्पताल को कई जरूरी जांच और वेरिफिकेशन पूरे करने होते हैं, जिसके बाद ही अंतिम मंजूरी मिलती है। अगर आपको भी कभी अस्पताल से डिस्चार्ज के समय क्लेम अप्रूवल में देरी का सामना करना पड़ा है, तो आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजहें और किन बातों का ध्यान रखकर इस प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है।
जब मरीज का इलाज पूरा हो जाता है, तब अस्पताल का इंश्योरेंस डेस्क मरीज के इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज इंश्योरेंस कंपनी या उसके थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) को भेजता है। इनमें एडमिशन रिकॉर्ड, डिस्चार्ज समरी, अंतिम बिल, दवाइयों की जानकारी, टेस्ट रिपोर्ट और डॉक्टर की मेडिकल नोट्स शामिल होते हैं। इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी यह जांचती है कि इलाज पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कवर है या नहीं। सभी जानकारी सही मिलने पर अस्पताल को अंतिम अप्रूवल भेजा जाता है और मरीज को डिस्चार्ज किया जाता है।
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क्लेम अप्रूवल में देरी की सबसे आम वजह अधूरे या गलत दस्तावेज होते हैं। अगर डिस्चार्ज समरी, अंतिम बिल, डॉक्टर की रिपोर्ट या दवाइयों की पर्ची पूरी नहीं होती, तो इंश्योरेंस कंपनी अतिरिक्त जानकारी मांग सकती है। इससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है। अगर फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है, तो यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि क्लेम सही मेंबर के नाम पर किया गया है। छोटी-सी गलती भी अप्रूवल में कई घंटे या कभी-कभी एक-दो दिन की देरी करा सकती है।
डिस्चार्ज से पहले अस्पताल मरीज का अंतिम बिल तैयार करता है। इसमें रूम चार्ज, डॉक्टर फीस, ऑपरेशन, दवाइयां, लैब टेस्ट, नर्सिंग चार्ज और अन्य मेडिकल खर्च शामिल होते हैं। इंश्योरेंस कंपनी यह जांचती है कि सभी खर्च इलाज से जुड़े हैं या नहीं और क्या वे पॉलिसी के तहत कवर किए जा सकते हैं। अगर किसी खर्च पर स्पष्टीकरण की जरूरत होती है, तो अस्पताल से एक्स्ट्रा जानकारी मांगी जाती है। इसी कारण क्लेम अप्रूवल में समय लग सकता है।
कुछ मामलों में केवल बिल पर्याप्त नहीं होता। यदि बीमारी गंभीर हो, सर्जरी जटिल हो या अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि सामान्य से अधिक रही हो, तो इंश्योरेंस कंपनी डॉक्टर की डिटेल रिपोर्ट या अतिरिक्त मेडिकल रिकॉर्ड मांग सकती है। उदाहरण के लिए यदि किसी मरीज का इलाज लंबे समय तक चला है या ICU में भर्ती रहना पड़ा है, तो क्लेम टीम यह समझना चाहती है कि इलाज वास्तव में मेडिकल आवश्यकता के अनुसार था या नहीं। यह प्रोसेस मरीज के हित और ट्रांसपैरेंसी दोनों के लिए महत्वपूर्ण होती है।
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हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की अपनी शर्तें होती हैं। कुछ बीमारियों पर वेटिंग पीरियड लागू होता है, कुछ उपचारों पर सब-लिमिट होती है और कई पॉलिसियों में रूम रेंट की भी सीमा तय होती है।डिस्चार्ज के समय इंश्योरेंस कंपनी यह सुनिश्चित करती है कि इलाज इन सभी नियमों के अंतर्गत आता है या नहीं। यदि कोई खर्च पॉलिसी के बाहर है, तो उसे मंजूरी नहीं मिलती और उसका भुगतान मरीज को स्वयं करना पड़ सकता है।
यदि अस्पताल का बिल काफी बड़ा हो या मरीज की एक से अधिक सर्जरी हुई हो, तो क्लेम की समीक्षा अधिक विस्तार से की जाती है। ऐसे मामलों में वरिष्ठ क्लेम अधिकारियों की मंजूरी भी आवश्यक हो सकती है। इसलिए हाई-वैल्यू क्लेम का अप्रूवल सामान्य क्लेम की तुलना में थोड़ा अधिक समय ले सकता है। फेस्टिव, हॉलिडे, वीकेंड या अस्पतालों में मरीजों की ज्यादा संख्या होने पर इंश्योरेंस कंपनियों और अस्पतालों के क्लेम डिपार्टमेंट पर एक्स्ट्रा प्रेशर रहता है। ऐसे समय में क्लेम अनुरोध क्रमवार प्रोसेस किए जाते हैं, जिससे अप्रूवल में थोड़ा विलंब हो सकता है। हालांकि सभी दस्तावेज पहले से तैयार हों और अस्पताल तथा मरीज दोनों समय पर जानकारी अवेलेबल कराएं, तो यह प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है।
डिस्चार्ज के समय परेशानी से बचने के लिए कुछ आसान बातों का ध्यान रखें। अस्पताल में भर्ती होते समय अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी की पूरी जानकारी दें। डिस्चार्ज समरी, मेडिकल रिपोर्ट और बिल सही तरीके से तैयार करवाएं। अस्पताल के इंश्योरेंस डेस्क के संपर्क में रहें और यदि इंश्योरेंस कंपनी कोई एक्स्ट्रा दस्तावेज मांगे तो उसे तुरंत अवेलेबल कराएं।
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