
लाइफस्टाइल डेस्क : 9 अप्रैल को ईस्टर का रविवार मनाया जा रहा है। ये दिन ईसाई धर्म के लोगों के लिए बेहद खास होता है, क्योंकि इसी दिन प्रभु ईसा मसीह का पुनर्जन्म हुआ था। लेकिन ईसा मसीह के जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म को लेकर कई तरह के मतभेद सामने आते हैं और लोग इसे लेकर कई प्रचलित कहानियां सुनाते हैं। लेकिन प्रभु ईसा मसीह की पुनर्जन्म की कहानी क्या है आइए हम आपको बताते हैं...
ईसा मसीह का जन्म
ईसाई धर्म के भगवान प्रभु यीशु मसीह का जन्म 25 दिसंबर AD1 को हुआ था। यहीं से अंग्रेजी कैलेंडर की शुरुआत हुई थी। उनका जन्म फलस्तीन के बेथलेहम शहर में हुआ था। यह ईसाइयों की सबसे पवित्र जगह मानी जाती है, इसे चर्च ऑफ नेटिविटी भी कहा जाता है।
जब यीशु को चढ़ा दिया सूली पर
प्रभु यीशु मसीह की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें सूली पर चढ़ा दिया था। वह दिन शुक्रवार का दिन था, इसलिए उस दिन को उनके बलिदान दिवस के रूप में गुड फ्राइडे कहा जाने लगा। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें उनके अनुयायी उन्हें बेहद याद करने लगे।
ईसा मसीह के पुनर्जन्म की कहानी
मान्यताओं के अनुसार, शुक्रवार के दिन जब यीशु को सूली पर चढ़ाया गया उसके बाद उन्हें घर-घर में याद किया जाने लगा। उस दौरान एक महिला ने अचानक लोगों को बताया कि प्रभु यीशु वापस जीवित हो गए। यह सुनकर लोग सहम गए। तब महिला ने बताया कि जब वो प्रार्थना करने के लिए उनकी कब्र पर गई तो पत्थर जगह पर नहीं थे। भगवान का शरीर कब्र में नहीं था। इस बीच एक पवित्र आत्मा वहां पर प्रकट हुई और कहा कि प्रभु यीशु जीवित है। वह दिन रविवार का दिन था इसलिए उसे ईस्टर रविवार कहा जाने लगा।
40 दिन तक लोगों के बीच रहे यीशु
जब ईसा मसीह जीवित होकर लोगों के पास आए , तो 40 दिन तक उन सभी के बीच रहे। इस दौरान उन्होंने सभी को ज्ञान की बातें सिखाई। कहा जाता है कि 40 दिनों बाद वह स्वर्ग चले गए। इसलिए ईस्टर संडे बहुत पवित्र दिन माना जाता है और 40 दिन तक लोग ईस्टर पर व्रत भी करते हैं।
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