
Snake Gender Identification: इंसानों और कई जानवरों को देखकर हम आसानी से बता देते हैं कि वो नर हैं या मादा। लेकिन सांपों के मामले में ऐसा नहीं है। जब भी हम किसी सांप को देखते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही आता है कि वो जहरीला है या नहीं। लेकिन जो लोग सांपों को करीब से समझते हैं, उनके मन में एक और सवाल होता है- ये सांप नर है या मादा? इंसानों और बाकी जानवरों की तरह सांपों का जेंडर बाहर से देखकर पहचानना बिल्कुल आसान नहीं है।
ज्यादातर सांपों को देखकर उनका जेंडर बताना मुश्किल होता है क्योंकि नर और मादा दोनों एक जैसे ही दिखते हैं। हालांकि, कुछ प्रजातियों में पूंछ के आकार से थोड़ा अंदाजा लग सकता है। कई सांपों में नर की पूंछ थोड़ी मोटी होती है और धीरे-धीरे पतली होती जाती है। वहीं, मादा सांप की पूंछ बहुत जल्दी पतली हो जाती है। कुछ प्रजातियों में नर सांप की पूंछ मादा से लंबी भी होती है।
सांपों का जेंडर तय करने में सबसे अहम भूमिका 'हेमीपेन्स' (Hemipenes) की होती है। नर सांपों में आमतौर पर दो हेमीपेन्स होते हैं, जो बाहर से नहीं दिखते। ये पूंछ के बेस पर, क्लोका (Cloaca) के पीछे अंदर की तरफ मुड़े होते हैं। मेटिंग (Mating) के दौरान इनमें से एक बाहर आता है और मादा सांप के क्लोका में जाता है। वैज्ञानिक तरीके से जेंडर पहचानने का यही सबसे बड़ा आधार है।
एक्सपर्ट्स सांपों का जेंडर पहचानने के लिए 'क्लोकल प्रोबिंग' (Cloacal Probing) तरीके का इस्तेमाल करते हैं। इसमें एक खास तरह के पतले और ब्लंट प्रोब को क्लोका के जरिए पूंछ के बेस में सावधानी से डाला जाता है। ध्यान रहे, यह कोई ऐसा तरीका नहीं है जिसे आप घर पर ट्राई करें। बिना सही ट्रेनिंग के ऐसा करने से सांप की पूंछ या उसके अंगों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए यह काम हमेशा किसी अनुभवी हरपेटोलॉजिस्ट (Herpetologist) या रेप्टाइल डॉक्टर से ही कराना चाहिए।
छोटे सांपों के लिए एक्सपर्ट्स 'पॉपिंग' (Popping) तकनीक अपनाते हैं। इसमें पूंछ के बेस पर एक खास तरीके से दबाव डाला जाता है, जिससे नर सांप का हेमीपेन्स बाहर आ जाता है। अगर यह बाहर आ जाए, तो वह नर सांप है। इस काम के लिए भी बहुत अनुभव चाहिए होता है। गलत तरीके या ज्यादा दबाव से सांप घायल हो सकता है। इसलिए वीडियो देखकर इसे खुद आजमाने की गलती बिल्कुल न करें।
जरूरत पड़ने पर सांपों का जेंडर जानने के लिए अल्ट्रासाउंड जैसे मेडिकल टेस्ट का भी सहारा लिया जाता है। रिसर्च बताती है कि अल्ट्रासाउंड के जरिए नर सांपों के हेमीपेन्स स्ट्रक्चर को आसानी से पहचाना जा सकता है। एक स्टडी में इस तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल भी किया गया है। यानी जरूरत पड़ने पर मेडिकल इमेजिंग से भी सांप का जेंडर पता लगाया जा सकता है।
सांपों की मेटिंग का तरीका भी काफी दिलचस्प है। शुरुआत में नर सांप मादा को पहचानने के लिए गंध और केमिकल सिग्नल्स (फेरोमोंस) का सहारा लेता है। मादा सांप से निकलने वाले खास केमिकल सिग्नल नर को अपनी तरफ खींचते हैं। मादा के पास पहुंचकर नर सांप उसे छूकर, उसके चारों ओर लिपटकर या उसके समानांतर चलकर अपना प्यार जताता है। कई बार नर सांपों को एक मादा के लिए आपस में लड़ते हुए भी देखा जा सकता है।
जब मादा सांप मेटिंग के लिए तैयार हो जाती है, तो दोनों सांपों के क्लोका करीब आ जाते हैं। नर सांप अपने दो हेमीपेन्स में से एक को बाहर निकालकर मादा के क्लोका में डालता है। इसी के जरिए स्पर्म मादा के शरीर में जाता है। सांपों में फर्टिलाइजेशन शरीर के अंदर ही होता है। प्रजाति के हिसाब से मादा सांप या तो अंडे देती है या फिर सीधे बच्चों को जन्म देती है।
सांपों के प्रजनन की एक और हैरान करने वाली बात यह है कि मादा सांप स्पर्म को स्टोर करके रख सकती है। कई प्रजातियों में मादाएं नर से मिले स्पर्म को लंबे समय तक सुरक्षित रख लेती हैं और जब माहौल अनुकूल होता है, तब उसका इस्तेमाल करती हैं। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ प्रजातियों में यह स्टोरेज पीरियड काफी लंबा हो सकता है। यही वजह है कि मेटिंग के बाद फर्टिलाइजेशन और अंडे बनने का समय हर सांप में अलग-अलग होता है।
Lifestyle articles & tips in Hindi (लाइफ स्टाइल न्यूज़): Read latest lifestyle articles, Relationship tips, Health & beauty tips, Travel news in Hindi online at Asianet News Hindi.