
11 अक्टूबर (रविवार) से नवरात्रि शुरू हो रही है। नवरात्रि का त्योहार बच्चों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और अच्छे संस्कारों से जोड़ने का अच्छा अवसर है। आप बच्चों को मां दुर्गा की पूजा में शामिल करने के साथ आसान संस्कृत श्लोक भी याद करा सकते हैं। इससे उन्हें धार्मिक परंपराओं को समझने और संस्कृत के श्लोकों से परिचित होने का मौका मिलेगा। शुरुआत छोटे और सरल श्लोकों से करें, ताकि बच्चे उन्हें आसानी से याद कर सकें। आइए जानते हैं मां दुर्गा के 10 आसान श्लोक, जिन्हें बच्चे नवरात्रि में पढ़ सकते हैं।
श्लोक:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
अर्थ: हे मां दुर्गा, आप सभी का मंगल करने वाली और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली हैं। हम आपको नमन करते हैं।
श्लोक:
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: मां दुर्गा सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं। हम उन्हें बार-बार प्रणाम करते हैं।
मंत्र:
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
अर्थ: यह मां दुर्गा का प्रसिद्ध बीज मंत्र है। इसमें मां दुर्गा को नमन किया जाता है।
श्लोक:
जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
अर्थ: मां दुर्गा के विभिन्न दिव्य स्वरूपों को नमन किया गया है। यह श्लोक देवी के अनेक रूपों का स्मरण कराता है।
श्लोक
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: मां दुर्गा सभी प्राणियों में मां के रूप में मौजूद हैं। यह श्लोक बच्चों को मातृत्व और ममता का महत्व समझाने में मदद कर सकता है।
श्लोक:
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: मां दुर्गा सभी प्राणियों में बुद्धि के रूप में विराजमान हैं। यह श्लोक ज्ञान और विवेक का महत्व बताता है।
श्लोक:
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: मां दुर्गा सभी प्राणियों में श्रद्धा के रूप में विराजमान हैं। यह श्लोक बच्चों को विश्वास और सम्मान का महत्व समझाने का अवसर देता है।
श्लोक:
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: मां दुर्गा सभी प्राणियों में समृद्धि और सौभाग्य के स्वरूप में विराजमान हैं। इस श्लोक के जरिए बच्चों को देवी के लक्ष्मी स्वरूप के बारे में बता सकते हैं।
मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
अर्थ: यह मां चामुंडा से जुड़ा एक पारंपरिक देवी मंत्र है। बच्चों को इसे सिखाते समय सही उच्चारण पर ध्यान दें।
श्लोक:
शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते॥
अर्थ: हे मां नारायणी, आप शरण में आने वाले दुखी और परेशान लोगों की रक्षा करती हैं। हम आपको नमन करते हैं।
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