
मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं घरों में सीलन, नमी और दीवारों पर दाग-धब्बों जैसी समस्याएं भी साथ लाता है। बरसात के दिनों में दीवारों में नमी घुसने लगती है, जिससे पेंट उखड़ने, फफूंदी बनने और बदबू आने की परेशानी शुरू हो जाती है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या घर की खूबसूरती के साथ-साथ हेल्थ पर भी असर डाल सकती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान उपाय अपनाकर आप अपनी दीवारों को सीलन से बचा सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसी 3 असरदार ट्रिक्स, जो मानसून में आपकी दीवारों को सेफ रखने में मदद कर सकती हैं।
अगर आपके घर की बाहरी या अंदरूनी दीवारों पर हर साल सीलन की समस्या होती है, तो वाटरप्रूफ कोटिंग एक बेहतरीन समाधान हो सकती है। बाजार में कई तरह के वाटरप्रूफ पेंट और सीलेंट उपलब्ध हैं, जो दीवारों पर एक सेफ्टी लेयर बना देते हैं। यह परत बारिश के पानी को दीवारों के अंदर जाने से रोकती है और नमी के असर को कम करती है। एक्सपर्ट के अनुसार मानसून शुरू होने से पहले वाटरप्रूफ कोटिंग करवा लेना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे दीवारें लंबे समय तक सेफ रहती हैं और पेंट की लाइफ भी बढ़ जाती है।
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सीलन का सबसे बड़ा कारण केवल बारिश का पानी नहीं, बल्कि घर के अंदर जमा होने वाली नमी भी होती है। यदि कमरों में प्रॉपर हवा का आवागमन नहीं होता, तो दीवारों पर नमी जमने लगती है और धीरे-धीरे फफूंदी बनने लगती है। बरसात के मौसम में रोज कुछ समय के लिए खिड़कियां और दरवाजे खोलकर रखें, ताकि ताजी हवा अंदर आ सके। जिन कमरों में धूप कम आती है, वहां एग्जॉस्ट फैन या डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। बेहतर वेंटिलेशन से दीवारें सूखी रहती हैं और सीलन की संभावना काफी कम हो जाती है।
कई बार दीवारों में सीलन का कारण छत, पाइपलाइन या दीवारों में मौजूद छोटी-छोटी दरारें होती हैं। बारिश का पानी इन दरारों से धीरे-धीरे अंदर पहुंचता है और दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है। मानसून शुरू होने से पहले घर की छत, बाहरी दीवारों और पानी की पाइपलाइन की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि कहीं क्रैक या लीकेज दिखाई दे, तो उसे तुरंत रिपेयर करवाएं। छोटी समस्या को समय पर ठीक करने से भविष्य में बड़े खर्च से बचा जा सकता है।
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नमी वाली दीवारें केवल देखने में खराब नहीं लगतीं, बल्कि यह घर के वातावरण को भी प्रभावित करती हैं। सीलन के कारण फफूंदी और बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो एलर्जी, सांस संबंधी समस्याओं और बदबू का कारण बनते हैं। इसके अलावा दीवारों का पेंट जल्दी खराब होने लगता है और घर की सुंदरता भी कम हो जाती है।