
लाइफस्टाइल डेस्क. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने संसदीय पारी का आगाज करते हुए वायनाड सांसद के तौर पर शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में प्रियंका केरल की संस्कृति में ढली हुई नजर आई। उन्होंने ट्रेडिशनल कसावु साड़ी पहनी थी। जिसका रंग क्रीम था और बॉर्डर गोल्डन कलर का था। वो इस खूबसूरत साड़ी में काफी क्लासिक लुक दे रही थीं। बता दें कि मलयाली संस्कृति में कसावु साड़ी की बहुत अहमियत है। शादी ब्याह और पारंपरिक उत्सव में इस साड़ी को पहना जाता है। आइए जानते हैं इस साड़ी की खासियत।
कसावु साड़ी केरल की संस्कृति से जुड़ा है। कसावु का मतलब जरी होता है जो कि सोने या चांदी के तारों से बना होता है। साड़ी की बुनावट कपास और रेशम के धागों से की जाती है। जिसे सुनहरे धागों के बॉर्डर से सजायादा जाता है। कसावु साड़ी को मशीन से नहीं बल्कि हाथों से बुनी जाती है। जिसकी वजह से प्रामाणिक और पारंपरिक लुक मिलती है। इसे बनाने में महीनों लग जाती है, क्योंकि काफी बारीकी से काम होती है। र्मी के मौसम में यह बेहद आरामदायक और हल्की होती है।
कसावु साड़ी को हाथ से बुनाई होती है जो वहां के स्थानीय कारीगर ही करते हैं। इस साड़ी का मुख्य आकर्षक इसका बॉर्डर होता है जो गोल्डन जरी से बनाया जाता है। यह साड़ी शादी, पूजा और पारंपरिक आयोजनों के लिए आदर्श मानी जाती है।
दरअसल केरल की संस्कृति में सफेद रंग को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। जबकि सुनहरे रंग को देवत्व से जोड़ा जाता है। ओणम, विषु, और शादी जैसे खास अवसरों पर सफेद और गोल्डन साड़ी पहनना शुभ माना जाता है। कसावु साड़ी सफेद और गोल्डन रंग से मिलकर बना होता है। इसलिए इस साड़ी को भगवान विष्णु और अन्य देवता के प्रति भक्ति का सिंबल माना जाता है।
केरल की गर्म और आर्द्र मौसम की वजह से यहां पर जॉर्जेट या शिफॉन की साड़ी महिलाएं नहीं पहन पाती है। इसलिए सूती साड़ी का बड़ा बाजार है। सफेद साड़ी की कपास और इसकी हल्की बनावट यहां के मौसम के लिए सही है।
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