
बीमारी के इलाज के दौरान आपने डॉक्टर को दिखाया और प्रिस्क्राइब की गई दवा का सेवन किया लेकिन कोई असर नहीं हुआ? ऐसी स्थिति में आखिर गलती किसकी मानी जाए? सोशल मीडिया हैंडल में डॉक्टर कनिका तिवारी इस प्रश्न का बेहद साधारण तरीके से उत्तर देती हैं। डॉ. कनिका कहती हैं कि डॉक्टर दवाओं की डोज का एक टाइम तय करते हैं। जब दवा सही समय पर नहीं खाई जाती, तो इसका असर कम या न के बराबर होने लगता है। आइए जानते हैं कि प्रिस्क्रिप्शन में OD, BD, TDS का क्या मतलब होता है?
कुछ दवाई ऐसी होती हैं, जो कम समय में ही शरीर में असर करने लगती हैं इसलिए इन दवाओं को हर 6 घंटे में लेना पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर कुछ दर्द निवारक दवाएं, बुखार की दवाई या कुछ एंटीबायोटिक डॉक्टर 6 घंटे में लेने की सलाह देते हैं। अगर सुबह 6:00 बजे के बाद दोपहर 12:00 बजे, शाम 6 बजे और रात को 12:00 बजे डॉक्टर के निर्देशानुसार ही दवा लें। जिन दवाओं को 6 घंटे के अंतर पर लिया जाता है डॉक्टर क्यूआईडी (QID) लिखते हैं।
एंटीबायोटिक्स और कुछ अन्य दवाएं दिन में 3 बार (TDS) लेने की सलाह दी जाती है। इन दवाओं को हर 8 घंटे में लेना होता है ताकि दवा का लेवल शरीर में बना रहे।
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BD (Twice Daily) लिखी दवाओं को सुबह 8 बजे और फिर रात 8 बजे खाना चाहिए। अगर आप कभी भी दवा खाएंगे, तो इससे दवा का असर कम हो सकता है।
अगर डॉक्टर दवा लिखते समय OD लिखते हैं, तो दवा रोज एक ही समय पर लेनी चाहिए। कुछ दवाई सुबह खाली पेट ली जाती हैं, वहीं कुछ दवाई रात में। सही समय, दवा के प्रकार के बारे में डॉक्टर से जानकारी जरूर लें। ऐसा करने से दवा का असर बना रहता है और संक्रमण का इलाज भी बेहतर होता है। साथ ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा भी सही समय पर दवा खाने से कम हो जाता है।
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नोट- यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी दवा का समय, सेवन के बारे में डॉक्टर से जरूर पूछें।
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