Guide for First Time Parents: बेबी का डायपर बारिश में भी रहेगा फ्रेश, अपनाएं ये आसान टिप्स

Published : Jun 30, 2025, 09:22 PM IST
Guide for First Time Parents: बेबी का डायपर बारिश में भी रहेगा फ्रेश, अपनाएं ये आसान टिप्स

सार

Newborn Care Tips for New Parents: डायपर से बच्चों की त्वचा पर रैशेज, एलर्जी, यहां तक कि फंगल इन्फेक्शन भी हो सकते हैं। खासकर बारिश के मौसम में यह समस्या बढ़ जाती है। सही डायपर इस्तेमाल और त्वचा की देखभाल जरूरी है।

नवजात और छोटे बच्चों की त्वचा बहुत नाज़ुक होती है। इसलिए उनकी देखभाल में ज्यादा सावधानी जरूरी है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में डायपर बच्चों की देखभाल में एक बड़ा सहारा बन गए हैं। लेकिन लंबे समय तक डायपर इस्तेमाल करने से बच्चे की त्वचा पर कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे रैशेज, एलर्जी, यहां तक कि फंगल इन्फेक्शन भी। खासकर बारिश के मौसम में नमी वाले माहौल में यह समस्या और बढ़ जाती है। माता-पिता को पता होना चाहिए कि कब, कहां और कितनी देर तक डायपर इस्तेमाल करना सुरक्षित है।

डायपर से बच्चे की स्किन को नुकसान

* अगर बच्चे की त्वचा पर लगातार फुंसियां, खुजली की समस्या दिखे तो इसे गंभीरता से लें।

* 1-5 साल के बच्चों में एक्जिमा हो सकता है। रैशेज, फुंसियांं, लाल दाने जैसे हो सकते हैं। इसलिए ध्यान रखें।

* एक और तरह के रैशेज होते हैं, जिन्हें अर्टिकेरिया कहते हैं। 2 से 3 साल के बच्चों को त्वचा पर ऐसी एलर्जी हो सकती है।

तो माता-पिता क्या करें?

* डायपर खरीदने से पहले उसका कपड़ा अच्छी तरह देख लें। मुलायम सूती कपड़े का ही डायपर खरीदें।

* बाहर जाते समय डायपर पहनाएं तो, थोड़ी-थोड़ी देर में उसे चेक करते रहें। गीला हो जाए तो तुरंत बदल दें।

* रात भर बच्चे को डायपर पहनाकर न सुलाएं। इससे बच्चे की सेहत को नुकसान होता है।

* लगातार डायपर पहनाए रखने से, त्वचा पर रगड़ लगने से रैशेज, एलर्जी होती है। त्वचा लाल होकर सूज जाती है, बच्चे को जलन होती है।

* डायपर से जो रैशेज होते हैं, उन्हें डॉक्टरी भाषा में ‘डायपर डर्मेटाइटिस’ कहते हैं।

* कई बार डायपर वाले हिस्से में फंगल इन्फेक्शन भी हो जाता है। इसके अलावा, कई बच्चों के डायपर वाले हिस्से पर लाल धब्बे दिखाई देते हैं। इसे 'सेबोरिक डर्मेटाइटिस' कहते हैं।

बच्चे की त्वचा की देखभाल कैसे करें?

* बच्चे की त्वचा के लिए कभी भी बड़ों वाला साबुन इस्तेमाल न करें। कम क्षारीय, pH बैलेंस 5.5 वाला साबुन ही इस्तेमाल करें।

* शरीर की सिलवटों में, जैसे- कूल्हे, बगल, नितंबों को हर रोज साबुन से साफ रखें। हफ्ते में दो-तीन बार पूरे शरीर पर अच्छी तरह साबुन लगाकर नहलाएं।

* हो सके तो क्षारीय साबुन की जगह जेल या क्रीम बेस्ड लिक्विड सोप इस्तेमाल करें। इसका pH बैलेंस बच्चों की त्वचा के लिए सही होता है।

* गर्म देशों में बच्चों की त्वचा पर गाढ़ी क्रीम की जरूरत नहीं होती। ऐसे में बॉडी लोशन इस्तेमाल करना बेहतर होता है। यह हल्का होता है और त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करता है।

* नहाने से पहले बच्चों की तेल मालिश करना हमेशा से चला आ रहा है। इससे मांसपेशियों का विकास, रक्त संचार अच्छा होता है। नारियल तेल और ऑलिव ऑइल बच्चे की त्वचा के लिए ज्यादा अच्छे होते हैं।

* पहले, जन्म के बाद तीन हफ़्ते तक तेल न लगाने, न नहलाने की सलाह दी जाती थी। क्योंकि, माँ के प्लेसेंटा से निकलने के बाद नवजात की त्वचा पर वर्निक्स केसिओसा नामक एक परत होती है। लेकिन अब सोच बदल गई है। डॉक्टर अब बच्चे को तेल, साबुन लगाकर नहलाने की सलाह देते हैं। क्योंकि, साफ-सफाई ही त्वचा रोगों को दूर रख सकती है।

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