
भाई ने बहन को किया किडनी डोनेट
हरियाणा के रोहतक की 31 साल की प्रिया का जब दोनों किडनी फेल हो गया तो डॉक्टर ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। बहन की जिंदगी जाती देखकर भाई राजन सामने आया। उसका ब्लड ग्रुप मैच हो गया और उसने अपनी बहन को किडनी दान कर दी। पांच घंटे चली इस लंबी सर्जरी में यह ट्रांसप्लांट पूरा हुआ। दोनों भाई बहन एक हेल्दी लाइफ जी रहे हैं। बचपन में खिलौने को लेकर लड़ने वाले भाई बहन एक दूसरे की जिंदगी को बचाने के लिए कुछ भी दे सकते हैं। ये कहानियां उसकी बानगी हैं।
भाई को बधाई नहीं देने का अफसोस ऐसा हुआ कि लिख दी 434 मीटर लंबी चिट्ठी
केरल की महिला कृष्णाप्रिया ने भाई के लिए 434 मीटर लंबी चिट्ठी लिखकर लोगों को हैरान कर दिया। दरअसल, ब्रदर्स डे पर छोटे भाई कृष्णप्रसाद ने उसे कई कॉल और मैसेज किए। लेकिन बिजी शेड्यूल की वजह से बहन ने जवाब नहीं दिया। जिसकी वजह से भाई नाराज हो गया। इंजीनियर बहन ने कई बार भाई को कॉल और मैसेज करने की कोशिश की, लेकिन उनके भाई ने उनका नंबर ब्लॉक कर दिया।अपने रूठे भाई को मनाने के लिए कृष्ण प्रिया ने भाई को चिट्ठी लिखने का फैसला किया। उसने उसे बनाने के लिए बिलिंग पेपर के 15 रोल्स लेकर आईं और उन सभी को भाई के लिए अपनी फीलिंग से भर दिया। इन चिट्ठियों को लिखने में उन्हें कुल 12 घंटे का समय लगा। जब इन सभी बिलिंग रोल्स को बॉक्स में पैक किया गया, तब इस बॉक्स का वज़न 5.27 किलोग्राम पाया गया। इन चिट्ठियों की कुल लंबाई की बात करें, तो इसकी लंबाई 434 मीटर मापी गई।
48 साल की बहन ने भाई को बचाया
बिहार के भागलपुर के खैरा गांव के रहने वाले संजय कुमार दास को 48 वर्षीय उनकी बड़ी बहन पुनीता सिन्हा ने अपनी किडनी देकर मौत के मुंह से बचा आज दोनों भाई-बहन स्वस्थ हैं और बेहतर जीवन जी रहे हैं।भाई-बहन का यह अनूठा प्यार हर कोई याद करता है।
खुद की जान देकर बचाई भाई की जान
वैसे तो कहानी पुरानी है, लेकिन 10 साल की बच्ची ने अपने भाई की जान बचाने के लिए खुद कुर्बान हो गई। बिहार के खगड़िया के पटेल नगर में रहने वाली लड़की रागिनी अब इस दुनिया में नहीं हैं। पापा राजेश रागिनी और बेटे अभिनीत को लेकर दुकान गए थे। इस दौरान रागिनी और अभिनीत बेकाबू ऑटो के सामने आ गए। बहन ने देखा कि दोनों ऑटो की चपेट में आ जाएंगे इसलिए उसने तुरंत भाई को धक्का देकर ऑटो के सामने से हटा दिया और खुद उसकी चपेट में आ गई। जिससे घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के 8 साल गुजर जाने के बाद भी फैमिली और गांव के लोग उसकी बहादुरी को याद करते हैं।
बहन ने भाई को किडनी दे बचाई जान
जिंदगी की जंग हार जाता जब मेरी बहन ना होती है, कहानी हरियाणा के फरीदाबाद से जुड़ी है। जहां पर एक बहन ने अपने भाई को किडनी देकर जान बचाई। रोपा जिसके दो बच्चे हैं जब पता चला कि उसके भाई की दोनों किडनी खराब हो गई है तो उसने बिना देर किए अपनी किडनी देने की बात की। वहीं भाई ललित कुमार ने बताया कि जनवरी 2023 में पता चला कि उनकी दोनों किडनी खराब है।डायलिलिस शुरू हो गया। बहन को जब पता चला तो उसने अपनी किडनी डोनेट करने की बात की। रोपा कहती है कि उन्हें बहुत खुशी है कि उन्होंने अपने छोटे भाई की जान बचाई।