
Madhya Pradesh High Court: ये सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि डॉक्टर पत्नी को 15 हजार रुपए मेंटेनेंस में देने का क्यों कोर्ट ने आदेश दिया? वो तो खुद कमाने में सक्षम है। लेकिन मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट ने महिला के फेवर में फैसला दिया है। इसके पीछे वजह उसका जॉबलेस होना है। महिला का पति ONGC में नौकरी करता है और मंथली इनकम 74,000 रुपए है। चलिए बताते हैं पूरा मामला।
महिला ने 20 फरवरी 2018 को रतलाम, मध्य प्रदेश में सभी हिंदू रीति-रिवाजों के साथ शादी की थी। लेकिन 14 नवंबर 2018 को उसने पति का घर छोड़ दिया। उसी दिन उसने कोर्ट में भरण-पोषण के लिए आवेदन दाखिल किया। महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति उसके साथ क्रूरता करता था और खर्चा नहीं देता था।
महिला ने कोर्ट को बताया कि शादी के बाद से ही उसका पति और ससुराल वाले प्रताड़ित करते थे। दहेज की मांग करने लगे थे। जब उनकी मांगों के आगे नहीं झुकी तो उन्होंने ससुराल से निकाल दिया। 24 जून 2018 को उसे घर से बाहर कर दिया गया।
वहीं, पति ने पत्नी की ओर से लगाए गए तमाम आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने कभी दहेज नहीं मांगा। उसने कहा कि बिना किसी कारण के वो अलग रह रही है। उसकी बहन एक वकील है और उसकी के कहने पर झूठा मामला मेरी पत्नी ने हमारे ऊपर दर्ज कराया है।
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पति ने कोर्ट को बताया कि उसकी पत्नी डॉक्टर है और कई हॉस्पिटलों में काम कर चुकी है, जिससे उसकी आय करीब 45,000 रुपए प्रतिमाह है। शख्स ने बताया कि उसके पैरेंट्स बुजुर्ग है और बीमारियों से पीड़ित है, इसलिए उसपर फैमिली की जिम्मेदारी है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी बेरोजगार है और उसे आर्थिक सहायता की जरूरत है। अदालत ने पति की मासिक आय को देखते हुए आदेश दिया कि वह हर महीने पत्नी को 15,000 रुपए भरण-पोषण के रूप में दे।
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