
Legal Rights for Women Before Marriage: शादी जिंदगी का एक अहम पड़ाव है। ये सिर्फ दो दिलों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी मिलन है। भारतीय समाज में शादी को बहुत अहमियत दिया जाता है। लेकिन, इस रिश्ते में कदम रखने से पहले कुछ कानूनों के बारे में जानना जरूरी है। ये आपकी शादीशुदा जिंदगी को आसान बनाएंगे और आने वाली मुश्किलों से बचाएंगे। शादी से पहले जानने लायक 6 जरूरी कानून।
यह कानून हिंदुओं, बौद्धों, जैनियों और सिखों पर लागू होता है। यह शादी से जुड़े कई पहलुओं को नियंत्रित करता है।
शादी की शर्तें:
1.शादी करने वाले दोनों में से किसी का भी कोई जीवित पति या पत्नी नहीं होना चाहिए। मतलब, कोई भी बिना तलाक लिए दूसरी शादी नहीं कर सकता। यह बहुविवाह पर रोक लगाता है।
2.दूल्हे की उम्र 21 साल और दुल्हन की उम्र 18 साल होनी चाहिए। यह उम्र सीमा कानूनी है और बाल विवाह को रोकती है।
3.शादी करने वाले दोनों मानसिक रूप से स्वस्थ होने चाहिए। मतलब, जो लोग फैसले लेने में असमर्थ हैं या मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं, वे शादी नहीं कर सकते।
4.एक ही गोत्र (भाई/बहन का रिश्ता) के लोग शादी नहीं कर सकते। अगर यह रिश्ता कानूनी तौर पर मान्य हो या किसी खास समाज के रिवाज के हिसाब से मंजूर हो, तो शादी हो सकती है। सपिंडा रिश्ता (मां की तरफ से तीन पीढ़ी, पिता की तरफ से पाँच पीढ़ी तक) में भी शादी पर रोक है।
तलाक: यह कानून तलाक के तरीके और कारण बताता है। जैसे, बेवफाई, क्रूरता, छोड़ देना, मानसिक बीमारी, कुष्ठ रोग, यौन रोग जैसी वजहों से तलाक मांगा जा सकता है। आपसी सहमति से तलाक का भी इसमें प्रावधान है।
गुजारा भत्ता: तलाक के बाद पत्नी को गुजारा भत्ता देने के नियम इस कानून में हैं। पति को अपनी पत्नी या माता-पिता को गुजारा भत्ता देना जरूरी है।
बच्चों की देखभाल: तलाक के बाद बच्चों की देखभाल, परवरिश और भलाई से जुड़े फैसले कोर्ट लेता है।
यह कानून अलग-अलग धर्मों के लोगों को आपस में शादी करने की इजाजत देता है। यह एक धर्मनिरपेक्ष विवाह है।
शर्तें: यह कानून भी हिंदू विवाह अधिनियम जैसी ही कुछ शर्तें रखता है। जैसे, दूल्हे की उम्र 21 साल, दुल्हन की उम्र 18 साल, और दोनों का कोई जीवित पति/पत्नी नहीं होना चाहिए।
रजिस्ट्रेशन: इस कानून के तहत शादी करने वालों को मैरिज रजिस्ट्रार को पहले से सूचना देनी होती है। 30 दिन बाद, अगर कोई आपत्ति नहीं आती, तो शादी रजिस्टर हो जाती है। यह ज़रूरी है, क्योंकि इससे शादी कानूनी रूप से मान्य हो जाती है।
उत्तराधिकार: विशेष विवाह अधिनियम के तहत रजिस्टर हुई शादियां, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत आती हैं। यह दूसरे धार्मिक कानूनों से अलग है।
दहेज निषेध अधिनियम, 1961:
यह कानून दहेज लेना, देना और मांगना, तीनों को अपराध मानता है।
दहेज क्या है: शादी के सिलसिले में सीधे या घुमा-फिरा कर दी जाने वाली कोई भी संपत्ति या सिक्योरिटी दहेज मानी जाती है।
सजा: दहेज लेने, देने और मांगने वालों को 5 साल तक की जेल, ₹15,000 का जुर्माना या दहेज की कीमत के बराबर जुर्माना हो सकता है।
शिकायत कैसे करें?: दहेज प्रताड़ना का शिकार हुई महिलाएं पुलिस या महिला आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती हैं। यह कानून महिलाओं को दहेज प्रताड़ना से बचाने का एक अहम जरिया है।
यह कानून महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने के लिए बना है। इसमें सिर्फ़ शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि गाली-गलौज, भावनात्मक, आर्थिक और यौन शोषण भी शामिल है।
सुरक्षा: यह कानून सिर्फ शादीशुदा महिलाओं को ही नहीं, बल्कि रिश्ते में रह रही महिलाओं, परिवारवालों द्वारा प्रताड़ित महिलाओं, सभी को सुरक्षा देता है।
प्रोटेक्शन ऑर्डर: कोर्ट हिंसा रोकने के लिए प्रोटेक्शन ऑर्डर जारी कर सकता है। जैसे, हिंसा करने वाला पीड़िता से दूर रहे, या पीड़िता को सुरक्षित जगह दी जाए।
गुजारा भत्ता: इस कानून के तहत पीड़िता गुजारा भत्ता मांग सकती है। बच्चों की देखभाल हिंसा से प्रभावित बच्चों की सुरक्षा में भी यह कानून मदद करता है।
यह कानून शादी से जुड़े अपराधों के लिए सजा का प्रावधान करता है।
धारा 498A: यह धारा शादीशुदा महिला को उसके पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा प्रताड़ित करने पर सजा तय करती है। इसमें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दोनों शामिल हैं। दहेज प्रताड़ना भी इसी धारा के तहत आती है। इसके लिए 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
धारा 304B: अगर शादी के 7 साल के अंदर किसी महिला की दहेज के कारण हत्या हो जाती है, तो उसे दहेज हत्या माना जाता है, जो एक संगीन अपराध है।
धारा 375, 376: वैवाहिक संबंधों में भी बलात्कार के खिलाफ कानून हैं।
यह कानून बाल विवाह रोकने के लिए बना है।
उम्र सीमा: इस कानून में शादी के लिए लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल तय की गई है।
सजा: बाल विवाह करने, कराने और उसमें मदद करने वालों को जेल और जुर्माना हो सकता है।
शादी रद्द करना: बाल विवाह को गैरकानूनी घोषित किया जा सकता है।
सुरक्षा: यह कानून बच्चों, खासकर लड़कियों को कम उम्र में शादी के कारण होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान से बचाता है।
शादी खुशी, प्यार और आपसी समझ का रिश्ता है। लेकिन, इस रिश्ते में कानूनी सुरक्षा और ज़िम्मेदारियाँ भी शामिल हैं। ऊपर बताए गए कानून लोगों के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय व समानता के लिए बनाए गए हैं। शादी से पहले इन कानूनों के बारे में जानना आपकी शादीशुदा ज़िंदगी को सुरक्षित और खुशहाल बनाने में मदद करेगा।
Relationship Tips in Hindi: Read relationship news (रिलेशनशिप न्यूज़) in Hindi. Get relationship advice, relationship articles, relationship problems advice and issues for men and women at Asianet News Hindi.