
हर थप्पड़ पर वो रो-रोकर बोलती होगी पापा मत मारो...मत मारो..वो रोती होगी..गिड़गिड़ाती होगी..लेकिन फिर भी उसका दिल नहीं पसीजा और मारता रहा। अंत में उस मासूम की सांसें रुक गई...उसके जन्मदाता ने ही उसकी जिंदगी छीन ली। दिल को चीर देने वाली ये कहानी फरीदाबाद से जुड़ी है। 4 साल की बच्ची का गुनाह सिर्फ इतना था कि वो 50 तक गिनती नहीं लिख पाई। बच्ची की मां के शिकायत पर पिता को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन सवाल है कि कैसे एक पिता अपनी बेटी को इतनी हैवानियत के साथ मार सकता है।
सोनभद्र के खरंटिया गांव के रहने वाले कृष्णा और उसकी पत्नी कई साल से फरीदाबाद के झाड़सेंतली गांव में रेंट पर रहते है। दोनों काम करते थे। प्राइवेट कंपनी में पत्नी डे की शिफ्ट करती है और कृष्णा नाइट की शिफ्ट। उनके 3 बच्चे हैं, जिसमें से एक इस दुनिया में नहीं रही। 7 साल का बेटा, 4 साल की बेटी और 2 साल की बेटी। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पत्नी जब दिन में काम पर चली जाती थी, तो कृष्णा बच्चों को संभालता था।
21 जनवरी को कृष्णा घर पर ही अपनी 4 साल की बेटी को पढ़ा रहा था और उसने उसे 50 तक गिनती लिखने को कहा। 4 साल की मासूम 50 तक गिनती नहीं लिख पाई। शायद ही इस उम्र में बच्चे इतने तक गिनती लिख पाते होंगे। लेकिन कृष्णा को यह बात समझ नहीं आई और उसने गुस्से में उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। बच्ची का रोना, गिड़गिड़ाना भी उसके हाथ को नहीं रोक पाया, हाथ तब रुकी जब उसकी सांसें बंद हो गईं। अपने गुनाह को उसने ढकने का बहाना बनाया कि बेटी खेलते हुए सीढ़ियों से गिर गई।
आरोपी कृष्णा ने फोकर करके पत्नी कहा कि बेटी सीढ़ियों से गिर गई है। वो उसे लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचा, जहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन बच्ची के शरीर पर पिटाई का निशान देखकर एक मां को शक हुआ। उसने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। पुलिस मौके पर पहुंचकर छानबीन करते हुए पिता को पकड़ लिया। सख्ती से पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। एक मां ने अपनी बेटी को इंसाफ के लिए दिल मजबूत किया और अपने ही पति को सलाखों के पीछे पहुंचाया।
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जिस उम्र में बच्चों से प्यार, धैर्य और समझदारी की जरूरत होती है, उस उम्र में उस पर हिंसा थोप बिल्कुल भी बर्दाश्त के काबिल नहीं होना चाहिए। यह घटना बताती है कि पैरेंटिंग का मतलब सिर्फ सिखाना नहीं, बल्कि बच्चे की मानसिक और भावनात्मक क्षमता को समझना भी है। हर बच्चा एक जैसी गति से नहीं सीखता। मार-पीट, डर और दबाव से बच्चे सीखते नहीं, बल्कि टूटते हैं। अच्छी परवरिश की नींव धैर्य, समझ और प्यार से बनती है, डर और मार से नहीं।
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