
Relationship Advice: मैं 55 साल की एक मां हूं। मेरे दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी अलग-अलग राज्यों के कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। इन दिनों मैं एक बढ़ती हुई दूरी और अलगाव की भावना से जूझ रही हूं। हाल ही में रेडिट पर एक महिला ने भी अपनी ऐसी ही कहानी साझा की है और लोगों से इस स्थिति में क्या करना चाहिए, इस पर सलाह मांगी है।यह बात बिल्कुल सच है कि एक मां की पूरी दुनिया उसके बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। लेकिन जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो उनकी प्रायोरिटी लिस्ट से मां धीरे-धीरे गायब होने लगती है। ऐसे में ज़्यादातर मांएं खुद को अकेला और उपेक्षित महसूस करती हैं जैसा कि इस महिला के साथ हो रहा है। आइए, जानते हैं उसकी पूरी कहानी और उन रिएक्शन के बारे में जो लोगों ने उसे सलाह के रूप में दी हैं।
55 साल की महिला के मुताबिक हमारी फैमिली हमेशा से बहुत करीब रही है। हम रोज एक साथ डिनर करते थे, वीकेंड पर आउटिंग करते थे। एक दूसरे से दिल की बात करते थे, जिनसे हम एक मजबूत टीम की तरह महसूस करते थे। लेकिन अब मेरे दोनों बच्चे अपनी नई जिंदगी में बिजी हो गए हैं। क्लासेज, दोस्त और वो सारी आजादी जो कॉलेज साथ लाता है। अब हमारे बीच बातचीत बहुत कम हो गई है। कभी-कभार एक टेक्स्ट या जल्दीबाजी में किए कॉल तक की करीबी रह गई है। ये सब अब मुझे सतही महसूस होती है।
वो बताती हैं कि अब फोन पर बस इतना ही होता है-मैं पूछती हूं, पढ़ाई कैसी चल रही है? जवाब मिलता है, "ठीक।" मैं कहती हूं, "बहुत मिस कर रही हूं तुम लोगों को," तो वो भी बस कहते हैं, "मैं भी।" इसके आगे ना कोई किस्से, ना वो छोटी-छोटी बातें जो कभी हमें करीब लाया करती थीं।
मैंने जो रिश्ता सालों में बच्चों के साथ बनाया है, उसे मैं बहुत संजोती हूं और किसी भी हालत में उसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहती ना ज्यादा टेक्स्ट करके, ना बार-बार कॉल करके, ताकि ऐसा न लगे कि मैं जरूरत से ज्यादा दखल दे रही हूं या चिपकी हुई हूं। मैं जानती हूं कि वो अपनी जिंदगी बना रहे हैं और उन्हें स्पेस चाहिए और मैं उस स्पेस की पूरी इज्जत करती हूं। लेकिन ये चुप्पी बहुत चुभती है, और खाली घर उस दूरी को और बढ़ा देता है। क्या किसी और ने कॉलेज के बाद अपने बच्चों के साथ इस तरह की दूरी को महसूस किया है? आपने कैसे इस तरह की दूरी को समझदारी से संभाला बिना उनके ऊपर बोझ डाले?'
महिला की इस कहानी पर ढेर सारे कमेंट आए हैं। जिसमें से कई लोगों ने यही राय दिया है कि इतना सोचना सही नहीं हैं। पुरानी तस्वीरें और फोन की घंटी का इंतजार करने की बजाय नई लाइफ शुरू करें। अपने शौक जिसे बच्चों की परवरिश की वजह से पूरी नहीं कर पाई है वो पूरे करें। नए दोस्त बनाएं, पुराने दोस्तों से मिलें। घूमने का प्लान करें। वहीं एक यूजर ने कहा कि कॉलेज लाइफ में बच्चे थोड़ा भटक जाते हैं। वो थोड़े बेपरवाह हो जाते हैं। लेकिन अगर आपका बच्चों के साथ रिश्ता अच्छा है तो भरोसा रखें, वो वापस लौटते हैं। बच्चों का आज आत्मनिर्भर होकर जीवन जीना इस बात का प्रमाण है कि उन्हें अंदर से यह भरोसा है कि अगर कुछ गलत हुआ तो आप उनके लिए हमेशा एक सेफ्टी नेट की तरह मौजूद रहेंगी। ज्यादा ना सोचें।
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आप चाहें तो बच्चों के साथ हफ्ते में एक दिन लंबी बातचीत का रूटीन बना सकती हैं। रोज-रोज बात करने की बजाए उनके साथ एक दिन बात करें और उनके पूरे हफ्ते के अनुभवों को जानें और खुद की बताएं। आप संडे का दिन चुन सकती हैं।
छोटे और अर्थपूर्ण मैसेज भेजें
आज तुम्हारे पसंद की रेसिपी बनाई है, तुम्हारी याद आ रही है। आज उसे देखा तो लगा कि तुम खेल रहे हो जैसे मैसेज उन्हें भेज सकती हैं। इससे वो भी आपसे जुड़ा महसूस करेंगे।
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अपने जीवन को भी संवारें
खुद के लिए नई हॉबी तलाशें, क्लब जॉइन करें या पुराने दोस्तों से जुड़ें। बच्चे जब देखेंगे कि आप भी अपनी जिंदगी एन्जॉय कर रही हैं, तो उनका गिल्ट कम होगा और वे खुद जुड़ने के लिए तैयार होंगे।
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