बच्चों की खामोशी में छुपा है डर! जानें स्कूल एंग्जाइटी के लक्षण और उपचार

Published : Sep 05, 2025, 08:07 PM IST
how to treat school anxiety naturally

सार

School Anxiety Symptoms in Students: बहुत से बच्चों को स्कूल एंग्जायटी की दिक्कत होती, जिसे बहुत से पेरेंट्स नहीं समझ पाते हैं। ऐसे में आज हम आपके साथ ये क्या है, इसके क्या लक्षण है और क्या उपचार है ये सबकुछ इस लेख में बताएंगे।

How to Treat School Anxiety Naturally: हर बच्चा स्कूल जाने को लेकर अलग-अलग भावनाएं महसूस करता है। कभी एक्साइटमेंट, कभी घबराहट और कभी हल्का सा डर या नर्वसनेस। लेकिन जब यह घबराहट धीरे-धीरे इतनी गहरी हो जाए कि बच्चा स्कूल का नाम सुनकर ही बेचैन हो जाए, तो पेरेंट्स को इसे सामान्य न मानकर गंभीरता से लेना जरूरी है। इस स्थिति को स्कूल एंग्जाइटी कहा जाता है। यह एक तरह की मेंटल हेल्थ समस्या है, जो अक्सर खामोशी, चुप्पी और बच्चे के व्यवहार में बदलाव के पीछे छिपी रहती है। इसका कारण स्कूल में हुई कोई घटना, किसी बच्चों का व्यवहार, टीचर्स और बच्चे के बीच का रिश्ता आदि कुछ भी हो सकता है।

स्कूल एंग्जाइटी क्या है?

स्कूल एंग्जाइटी एक ऐसी हेल्थ इश्यू है जिसमें बच्चा स्कूल जाने को लेकर लगातार डर, स्ट्रेस या घबराहट महसूस करता है। यह केवल पढ़ाई की वजह से नहीं होता, बल्कि नई जगह, दोस्तों से मेलजोल, टीचर का सख्त व्यवहार या घर से दूर रहने का डर भी इसके कारण हो सकते हैं। धीरे-धीरे यह समस्या इतनी गहरी हो सकती है कि बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाता है, पेट दर्द या सिर दर्द की शिकायत करता है, ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े।

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लक्षण जो नजर अंदाज नहीं करने चाहिए

अक्सर पेरेंट्स बच्चों की खामोशी को “शर्मीला स्वभाव” मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह स्कूल एंग्जाइटी के लक्षण हो सकता है। इसके लक्षणों में सुबह उठते ही बेचैनी महसूस करना, बार-बार पेट दर्द या सिर दर्द की शिकायत करना, क्लास में भाग लेने से बचना, दोस्तों से दूरी बनाना और बार-बार रोने लगना जैसी हरकतें शामिल हैं। कई बार बच्चा ज्यादा चुपचाप हो जाता है या अचानक गुस्से में आने लगता है। यह बदलाव बताता है कि उसके मन में कुछ चल रहा है, जिसे वह शब्दों में नहीं कह पा रहा।

कैसे करें इस प्रॉब्लम को ठीक

स्कूल एंग्जाइटी का इलाज केवल दवा से नहीं, बल्कि प्यार, धैर्य और समझदारी से होता है। सबसे पहले माता-पिता को बच्चे की भावनाओं को समझना और उसे सुनना चाहिए। यदि बच्चा स्कूल जाने से डर रहा है तो उसका कारण पूछें और उसे भरोसा दिलाएं कि वह अकेला नहीं है, उसके पेरेंट्स उसके साथ हैं। घर पर छोटे-छोटे एक्टिविटी किए जा सकते हैं, जैसे बच्चे को स्कूल का माहौल खेल-खेल में दिखाना, टीचर से फ्रेंडली बातचीत करवाना या उसे अपने दोस्तों से मिलने का टाइम देना।

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यदि समस्या गहरी है तो काउंसलर या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना बहुत जरूरी है। धीरे-धीरे पॉजिटिव माहौल और रेगुलर सपोर्ट से बच्चा अपनी एंग्जाइटी पर काबू पा सकता है।

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