
Maintenance Rule For wife: सोचिए, अगर आपके पति की सैलरी बढ़े लेकिन उसका असर आपके जीवन पर न पड़े, तो कैसा लगेगा? अक्सर महिलाएं शादी के बाद अपना करियर या आर्थिक स्वतंत्रता पीछे छोड़ देती हैं और पति की आय पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में जब जीवनयापन का खर्च बढ़ता है, तो गुजारा भत्ता भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए। इसी संदर्भ में दिल्ली हाई कोर्ट का हालिया फैसला काफी अहम और रोचक है।
दरअसल, एक बुजुर्ग महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे हर महीने केवल 10,000 रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश था। महिला का कहना था कि समय के साथ खर्चे बढ़ गए हैं, दवाइयों का खर्च अलग है, लेकिन पति की बढ़ती पेंशन का फायदा उन्हें नहीं मिल रहा।
अदालत में यह तथ्य सामने आया कि 2012 में पति की मासिक आय 28,705 रुपए थी, लेकिन अब उनकी पेंशन बढ़कर 40,068 रुपए हो चुकी है। यानी आय में लगभग 40% की वृद्धि हो चुकी थी। इसके बावजूद पत्नी का भत्ता वहीं का वहीं रहा। फैमिली कोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि जब पति की आय बढ़ी है तो पत्नी के भरण-पोषण में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। अदालत ने साफ कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और सम्मानजनक जीवन जीने का हक पत्नी को भी है। ऐसे में पति की आय बढ़ने पर गुजारा भत्ते में संशोधन पूरी तरह जायज है।
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इस कपल की शादी 1990 में हुई थी और पत्नी 1992 से अलग रह रही थी। उसने दावा किया था कि उसका पति और ससुराल वाले दहेज के लिए तंग करते हैं। साल 2011 में तलाक की अर्जी दाखिल की थी, लेकिन अर्जी खारिज हो गई। इसलिए यह जोड़ा शादीशुदा ही रहा, लेकिन अलग-अलग। साल 2012 में फैमिली कोर्ट ने पत्नी को पति द्वारा हर महीने 10 हजार रुपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। तब से उसे इतने ही पैसे मिल रहे हैं। साल 2018 में महिला ने भरण-पोषण करने के लिए 30 हजार रुपए मांग की थी। लेकिन साल 2024 में मांग को खारिज कर दिया। जिसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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