
नई दिल्लीः अगर शादी के दौरान कोई महिला किसी दूसरे रिश्ते से गर्भवती हो जाती है, तो उस बच्चे का पिता कौन होगा, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 के तहत, एक वैध शादी के दौरान पैदा हुए बच्चे को पति का ही कानूनी बच्चा माना जाता है। इसका मतलब है कि शादीशुदा महिला का कानूनी पति ही उस बच्चे का पिता कहलाएगा। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के जैविक पिता से ज्यादा उसके सम्मान को प्राथमिकता देना जरूरी है, इसलिए बच्चा कैसे भी पैदा हुआ हो, महिला का कानूनी पति ही उसका पिता होगा।
लेकिन अगर शादी के बाद पति-पत्नी के बीच गर्भधारण करने लायक कोई शारीरिक संबंध नहीं बना हो, तो उस स्थिति में पति को कानूनी तौर पर इसे चुनौती देने का मौका दिया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ पत्नी को व्यभिचारी बताकर या बच्चे का डीएनए टेस्ट कराकर ऐसा नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 का हवाला देते हुए कहा कि बच्चे का असली पिता कोई भी हो, महिला का कानूनी पति ही बच्चे का पिता कहलाएगा। बिना किसी गलती के बच्चे को बदनामी से बचाना जरूरी है। इसलिए, जजों ने कहा कि अगर शादी के बाद पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध रहे हैं, तो भले ही बच्चा किसी और से पैदा हुआ हो, महिला का कानूनी पति ही उसका पिता होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पितृत्व को नकारने के लिए अदालतें ऐसे मामलों में डीएनए टेस्ट का आदेश नहीं दे सकतीं। उन्होंने साफ किया कि इस नियम का मकसद बच्चे की भावनात्मक, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को बनाए रखना है और परिवार के निजी मामलों का इस्तेमाल बच्चे को बदनाम करने के लिए होने से रोकना है।