Puffer-Fishing Dating Trend: ऑनलाइन डेटिंग का नया खतरा! जानिए क्या है 'पफर-फिशिंग' और कैसे टूट रहे हैं रिश्ते

Published : May 30, 2026, 10:22 AM IST
Puffer-Fishing Dating Trend

सार

"पफर-फिशिंग" डेटिंग ट्रेंड का मतलब क्या होता है? इस ट्रेंड का नाम "पफरफिश" मछली से कैसे जुड़ा हुआ है? लोग ऑनलाइन डेटिंग में अपनी असली पहचान छिपाकर बेहतर छवि क्यों पेश करते हैं? पफर-फिशिंग का रिश्तों में भरोसे और संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?

ऑनलाइन डेटिंग की दुनिया में एक नया ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। इसमें लोग अपनी असली पहचान छिपाकर एक नकली और दिखावटी पर्सनैलिटी पेश करते हैं। पहली नजर में तो सब कुछ परफेक्ट लगता है, लेकिन जब सच्चाई सामने आती है तो रिश्तों में दरार पड़ जाती है। इस नए ट्रेंड का नाम है 'पफर-फिशिंग'। चलिए, इसके बारे में जानते हैं।

आखिर क्या है ये नया डेटिंग ट्रेंड?

आजकल मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने डेटिंग का तरीका पूरी तरह से बदल दिया है। पहले लोग एक-दूसरे को समझने के लिए आमने-सामने मिलते थे, लेकिन अब ज्यादातर रिश्ते ऑनलाइन ही बनते-बिगड़ते हैं। इसी ऑनलाइन दुनिया में समय-समय पर नए-नए रिलेशनशिप ट्रेंड्स सामने आते रहते हैं। इन दिनों "पफर-फिशिंग" शब्द तेजी से पॉपुलर हो रहा है। ये शब्द सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन बहुत से लोग इस तरह के रिश्तों में फंस रहे हैं।

क्या होता है 'पफर-फिशिंग'?

पफर-फिशिंग का मतलब है जब कोई इंसान असल में जैसा है, वैसा न दिखाकर खुद को ज्यादा बेहतर, अट्रैक्टिव या कामयाब दिखाने की कोशिश करता है। कई लोग सोशल मीडिया या डेटिंग ऐप्स पर अपनी बहुत स्टाइलिश तस्वीरें पोस्ट करते हैं। कुछ लोग अपनी जिंदगी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं ताकि वे दूसरों को इम्प्रेस कर सकें। इस डेटिंग ट्रेंड का नाम "पफरफिश" नाम की एक मछली से आया है। जब उस मछली को कोई खतरा महसूस होता है, तो वह खुद को फुलाकर असल से कहीं ज्यादा बड़ा दिखाने लगती है। ठीक इसी तरह, कुछ लोग ऑनलाइन दुनिया में खुद को वैसा दिखाने की कोशिश करते हैं, जैसे वे असल में हैं नहीं।

लोग ऐसा करते क्यों हैं?

आज के दौर में हर कोई चाहता है कि लोग उसे पसंद करें और उसकी तारीफ करें। इसीलिए कई लोग अपनी कमियों को छिपाते हैं और सिर्फ अपनी अच्छी बातें ही दिखाते हैं। कुछ लोगों को डर होता है कि अगर उन्होंने अपनी असलियत बता दी, तो शायद सामने वाला उन्हें पसंद न करे। सोशल मीडिया पर दूसरों की ग्लैमरस लाइफ देखकर भी लोग खुद को वैसा ही दिखाने की कोशिश करने लगते हैं। धीरे-धीरे यह एक आदत बन जाती है और लोग अपनी असलियत से दूर होने लगते हैं।

रिश्तों पर इसका क्या असर होता है?

शुरुआत में यह सब नॉर्मल लग सकता है, लेकिन बाद में जब सच्चाई सामने आती है, तो इससे रिश्तों में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। जब दूसरे इंसान की असलियत पता चलती है, तो महसूस होता है कि अब तक जो प्यार या पर्सनैलिटी दिखाई गई, वह सब झूठ थी। इससे भरोसा टूट जाता है और रिश्ता कमजोर पड़ जाता है। लोग अक्सर अपनी इमेज, नौकरी, आदतों या लाइफस्टाइल को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। लेकिन सच ज्यादा दिन तक छिप नहीं सकता और यही बात रिश्तों में दूरियां ले आती है।

तो क्या यह पूरी तरह से झूठ है?

पफर-फिशिंग में लोग अपने बारे में पूरी तरह से झूठ नहीं बोलते, बल्कि वे अपनी असलियत को छिपाकर उसे एक बेहतर पैकेजिंग में पेश करते हैं। इसका मतलब है कि इंसान तो असली है, लेकिन उसकी ऑनलाइन इमेज काफी हद तक बदली हुई होती है। कई लोग इसे छोटा-मोटा झूठ मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका असर रिश्तों पर पड़ता है। किसी भी रिश्ते की बुनियाद सच्चाई और भरोसे पर टिकी होती है। अगर वही न हो, तो रिश्ता ज्यादा दिन तक नहीं चल पाता।

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