Haldi ceremony के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर से बाहर क्यों नहीं निकलने दिया जाता?

Published : Dec 19, 2025, 07:36 AM IST
Haldi ceremony Rituals

सार

Haldi ceremony Rituals: हल्दी लग जाने के बाद दूल्हा और दुल्हन को घर से बाहर निकलने से मना किया जाता है। इसके पीछे धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक तीनों कारण है, आइए बताते हैं। 

हिंदू धर्म की शादी में कई तरह की रस्में निभाई जाती है। शादी से पहले ढेरों रस्म होती है और शादी के बाद भी कुछ रिचुअल्स निभाएं जाते हैं। इसलिए हिंदू शादियां की रौनक कई दिनों तक चलती है। इन्हीं रस्मों में से एक खास पावन रस्म होती है हल्दी सेरेमनी। इसमें शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन को अपने-अपने घर पूरे शरीर पर हल्दी लगाई जाती है। बड़े हल्दी लगाकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। हल्दी लगाने के बाद जितने दिन बाद शादी होती है, उतने दिन तक उन्हें घर से निकलने नहीं दिया जाता है। आखिर ऐसा क्या हो जाता है कि हल्दी लगने के बाद इन्हें घर से नहीं निकलने दिया जाता है? तो चलिए जानते हैं, इसके पीछे की वजह।

शादी में हल्दी रस्म का महत्व

हल्दी को हिंदू संस्कृति में बेहद शुभ माना गया है। यह सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि आयुर्वेद के अनुसार औषधीय गुणों से भरपूर है। विवाह में हल्दी लगाने की परंपरा खूबसूरती को निखारने के साथ-साथ मंगल कार्य की शुरुआत का प्रतीक मानी जाता ही। मान्यता है कि हल्दी लगाने से निगेटिव एनर्जी दूर होती है और मन शांत रहता है। इसके साथ ही सौभाग्य और सुरक्षा का प्रतीक भी है।

धार्मिक मान्यता क्या कहती है?

धार्मिक नजरिए से माना जाता है कि हल्दी लगाने के बाद शरीर से एक विशेष सुगंध निकलती है, जो पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह की एनर्जी को अट्रैक्ट करती है। इस समय शरीर एनर्जी से भरपूर होता है। ऐसे में अगर दूल्हा-दुल्हन हल्दी लगाने के बाद घर से बाहर जाते हैं और किसी निगेटिव या अशुभ ऊर्जा के संपर्क में आ जाते हैं, तो इसका असर वैवाहिक जीवन पर पड़ सकता है। इसी कारण उन्हें घर में ही रहने की सलाह दी जाती है, ताकि विवाह में किसी तरह की बाधा न आए।

ज्योतिष के अनुसार कारण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हल्दी की सुगंध का संबंध राहु और केतु जैसे ग्रहों से माना जाता है। हल्दी के बाद बाहर निकलने से इन ग्रहों का प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव या अशांति हो सकती है। इसलिए ज्योतिषीय कारणों से भी दूल्हा-दुल्हन को हल्दी के बाद घर से बाहर न जाने की परंपरा चली आ रही है।

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हल्दी से जुड़ा वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिक दृष्टि से हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, जो त्वचा के अंदर तक असर करती है। हल्दी लगाने के बाद त्वचा बेहद संवेदनशील हो जाती है। ऐसे में धूप में निकलने से स्किन बर्न, टैनिंग या एलर्जी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा हल्दी लगाने से त्वचा के रोमछिद्र (पोर्स) खुल जाते हैं, जिससे बाहर की धूल-मिट्टी आसानी से त्वचा पर जम सकती है। इसी कारण पुराने समय में यह कहा जाता था कि हल्दी के बाद बाहर न जाएं, ताकि त्वचा की चमक बनी रहे।

हल्दी सेरेमनी का सामाजिक पहलू

इस रस्म का एक सामाजिक महत्व भी है। हल्दी के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर में रहने की सलाह इसलिए दी जाती है, ताकि वे परिवार और रिश्तेदारों के साथ इस खास समय का आनंद ले सकें। इस दौरान घर की महिलाएं गीत गाती हैं, हंसी-मजाक होता है और पारिवारिक रिश्तों में और गहराई आती है। यह रस्म परिवारिक एकता और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है।

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