
स्किन की समस्याओं को हम लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जानकारी गलत होने के कारण ये समस्याएं समय के साथ बढ़ती हैं। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. आंचल पंथ ने ऐसे ही 10 मिथ के बारे में बताया है, जिसे अक्सर लोग सच समझते हैं। जानिए स्किन केयर के दौरान कौन सी बातें ध्यान रखें और किससे प्रॉब्लम बढ़ सकती है।
डार्क सर्कल्स जेनेटिक्स, आंखों के नीचे पतली त्वचा और दिखाई देने वाली ब्लड वेसल्स की वजह से होते हैं। साथ ही पिगमेंटेशन, हड्डियों की बनावट और फैट के कारण आते हैं। क्रीम से कुछ समय के लिए हाइड्रेशन तो बेहतर हो सकता है, लेकिन डार्क सर्कल पूरी तरह खत्म नहीं होते।
नेचुरल चीजें हमेशा स्किन के लिए अच्छी नहीं होती हैं। कुछ चीजें जलन पैदा कर सकती हैं, एलर्जी का कारण बन सकती हैं या अस्थिर हो सकती हैं। नींबू का रस या एसेंशियल ऑइल स्किन को परेशानी में डाल सकते हैं। सुरक्षा टेस्टिंग और फॉर्मूलेशन से आती है।
"केमिकल-फ्री" सिर्फ़ एक मार्केटिंग का तरीका है। पानी और ऑक्सीजन समेत हर चीज केमिकल है। ऐसे लेबल में लोगों को गुमराह करने वाली बात लिखी जाती है। डर फैलाकर प्रोडक्ट को बेचा जाता है।
किसी की स्किन अच्छी है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें सलाह देने का हक है। एक ही सलाह हर किसी की बायोलॉजी पर लागू नहीं होती। डर्मेटोलॉजी पूरी तरह से साइंस पर डिपेंड करती है और आपको सिर्फ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
"नॉन-कॉमेडोजेनिक" का मतलब है कि किसी चीज से रोमछिद्र बंद होने की संभावना कम है, लेकिन यह पक्का नहीं है। सेंसिटिव या एक्ने-प्रोन स्किन पर "नॉन-कॉमेडोजेनिक" प्रोडक्ट्स भी एक्ने का कारण बन सकते हैं।
स्किन में एक्ने हो या फिर कोई और समस्या, डॉक्टर का मानना है कि उसे हील होने में समय लगता है। अगर कोई आपसे जल्दी हीलिंग का दावा करता है, तो आपको विश्वास नहीं करना चाहिए।
अगर सोशल मीडिया में इस तरह की पोस्ट की जा रही हैं, तो उसमे विश्वास न करें।उम्र बढ़ने के साथ स्किन से नैचुरली कोलेजन, इलास्टिन और फैट कम हो जाते हैं। इसे बदल नहीं सकते।
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एक्ने, रोसैसिया, एक्जिमा और सोरायसिस जैसी समस्याएं पूरी तरह से ठीक नहीं होती। इन्हें कंट्रोल किया जा सकता है पूरी तरह ठीक नहीं।
पैराबेंस पर बहुत रिसर्च हुई है और इन्हें बहुत कम, सुरक्षित मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। ये प्रोडक्ट्स में बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ने नहीं देते और संक्रमण से बचाते हैं।
खराब नींद, स्ट्रेस और खराब डाइट से सूजन और ब्रेकआउट्स बढ़ते हैं, जिस पर क्रीम का भी खास असर नहीं होता है।
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