World Health Organization Cancer Report: WHO की Global Status Report on Cancer 2026 के अनुसार 2050 तक दुनिया में कैंसर के नए मामले 3.5 करोड़ तक पहुंच सकते हैं। जानिए रिपोर्ट की बड़ी बातें, कारण, जोखिम और बचाव के उपाय।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर को लेकर एक शॉकिंग रिपोर्ट जारी की है। WHO Global Status Report on Cancer 2026 के अनुसार, आने वाले 25 सालों में दुनिया भर में कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक हर साल कैंसर के लगभग 3.5 करोड़ (35 मिलियन) नए मामले सामने आ सकते हैं, जो मौजूदा आंकड़ों की तुलना में करीब 66.7% ज्यादा होंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया की 92% आबादी अपने जीवनकाल में किसी न किसी रूप में कैंसर की चपेट में होगी, चाहे उन्हें खुद यह बीमारी हो या उनके परिवार, दोस्त या करीबी व्यक्ति को कैंसर का सामना करना पड़े। एक्सपर्ट का मानना है कि कैंसर अब सिर्फ एक हेल्थ प्रॉब्लम नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और आर्थिक चुनौती भी बनता जा रहा है।
2050 तक क्यों बढ़ेंगे कैंसर के मामले?
WHO के अनुसार, कैंसर हर साल लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) लोगों की मौत का कारण बन रहा है। यानी औसतन हर दिन 26,000 से अधिक लोगों की जान कैंसर की वजह से जाती है। हार्ट प्रॉब्लम के बाद कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में बढ़ती आबादी, लोगों की बढ़ती उम्र, बदलती लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय कारण कैंसर के मामलों में तेजी की प्रमुख वजह हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर समय रहते रोकथाम और जागरूकता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले सालों में हेल्थ केयर पर इसका बड़ा दबाव पड़ेगा।
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लगभग 40% कैंसर मामलों को रोका जा सकता है
WHO और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के अनुसार, हर 10 में से लगभग 4 कैंसर के मामले ऐसे हैं जिन्हें सही लाइफस्टाइल अपनाकर रोका जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कैंसर का इलाज हर देश में समान रूप से अवेलेबल नहीं है। जैसे हाई इनकम वाले देशों में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लगभग 87% महिलाएं कम से कम पांच साल तक जीवित रहती हैं, जबकि कम आय वाले देशों में यह आंकड़ा लगभग 42% है। इसकी सबसे बड़ी वजह समय पर जांच न होना, इलाज में देरी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है।
कैंसर के प्रमुख जोखिम कारण
- तंबाकू और धूम्रपान
- शराब का अधिक सेवन
- मोटापा
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- असंतुलित और जंक फूड डाइट
- वायु प्रदूषण
- HPV संक्रमण
- हेपेटाइटिस B और C
- हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) संक्रमण
एक्सपर्ट का कहना है कि इन जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखकर कैंसर के कई मामलों से बचा जा सकता है।

सभी देशों में नहीं मिल रही जरूरी कैंसर सेवाएं
WHO के अनुसार, दुनिया के तीन में से केवल एक देश ने ही कैंसर के इलाज को अपनी यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (Universal Health Coverage) में पूरी तरह शामिल किया है। इसके कारण लाखों लोगों को समय पर जांच, इलाज और दवाएं नहीं मिल पातीं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कम आय वाले देशों में जरूरी कैंसर दवाओं की अवेलेबिटी काफी लिमिटेड है, जिससे मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के कुल कैंसर मामलों में 50.7% और कैंसर से होने वाली 56.5% मौतें एशिया में दर्ज की गईं। इसकी मुख्य वजह एशिया की बड़ी आबादी है।
पुरुषों में सबसे आम कैंसर - फेफड़ों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर कोलोरेक्टल (बड़ी आंत) कैंसर
महिलाओं में सबसे आम कैंसर - ब्रेस्ट कैंसर, फेफड़ों का कैंसर कोलोरेक्टल कैंसर
फेफड़ों का कैंसर आज भी दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
क्या करें ताकि कैंसर का खतरा कम हो?
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ स्वस्थ आदतें अपनाकर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
- शराब का सेवन सीमित करें या न करें।
- रोज कम से कम 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।
- फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार लें।
- स्वस्थ वजन बनाए रखें।
- HPV और हेपेटाइटिस B जैसे जरूरी टीके समय पर लगवाएं।
- उम्र और जोखिम के अनुसार डॉक्टर की सलाह से नियमित कैंसर स्क्रीनिंग कराएं।
- प्रदूषण और हानिकारक रसायनों के संपर्क को कम करने की कोशिश करें।
