Sikkims top 5 perfect monasteries:अगर आप ट्रैकिंग के साथ-साथ शांति और ट्रेडिशन से भी जुड़ना चाहते हैं तो सिक्किम की ये 5 मॉनास्ट्रीज आपके सफर का हिस्सा जरूर होनी चाहिए। मन की शांति मिलने के साथ-साथ आपको संस्कृति और इतिहास को जानने का मौका मिलेगा।
गंगटोक से करीब 28 किमी दूर स्थित, यह मठ अपने प्राचीन वॉल पेटिंग और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां का हर कोना बौद्ध संस्कृति की झलक दिखाता है।यह तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों दोनों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
खुलने का समय – सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक।
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रुमटेक मॉनास्ट्री (गंगटोक के पास)
सिक्किम की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध मॉनास्ट्री, रुमटेक मठ कर्मा कग्यू बौद्ध संप्रदाय का मुख्यालय भी है। यह हर दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खुली रहती है। यहां के भव्य प्रार्थना कक्ष, दीवारों पर बनी मनमोहक पेंटिंग्स (फ्रेस्को) और पहाड़ों के खूबसूरत दृश्य आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे।
एंट्री फीस – 10 रुपए प्रति व्यक्ति।
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एंचे मॉनास्ट्री (गंगटोक)
गंगटोक से सिर्फ 3 किमी की दूरी पर स्थित एंचे मॉनास्ट्री 200 साल पुरानी है और न्यिंगमा पंथ की वज्रयान परंपरा का हिस्सा है। यह मठ देवदार और चीड़ के पेड़ों से घिरा हुआ है और ध्यान के लिए एकदम उपयुक्त स्थान है।
गंगटोक से लगभग 7 किमी दूर स्थित यह मठ अपनी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। मठ रोज़ सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। यहां ध्यान लगाने और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को महसूस करने का बेहतरीन अवसर मिलता है।
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रालंग मॉनास्ट्री (रवंगल के पास)
दक्षिण सिक्किम के रवंगल से 6 किमी दूर स्थित रालंग मठ थंका पेंटिंग्स के विशाल संग्रह और रंगीन त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर साल सितंबर के आसपास पांग ल्हाब्सोल उत्सव मनाया जाता है, जो माउंट कंचनजंघा को समर्पित होता है। यह पर्व देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।
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