
भारतीय रेलवे में सफर करने वाले ज्यादातर यात्रियों को लगता है कि स्लीपर टिकट होने पर AC कोच में सफर नहीं कर सकते हैं। लेकिन कई बार ट्रेन में सीटें खाली होने पर TTE कुछ नियमों के तहत स्लीपर में यात्रा करने वाले यात्रियों को AC कोच में सीट अलॉट कर सकते हैं। हालांकि यह सुविधा हर यात्री को नहीं मिलती और इसके लिए रेलवे के तय नियमों का पालन करना जरूरी होता है। अगर आप भी लंबी यात्रा में ज्यादा आराम और एसी में सफर करना चाहते हैं, तो रेलवे के इन नियमों को जानना आपके काम आ सकता है।
अगर ट्रेन के AC कोच में सीटें खाली रह जाती हैं, तो TTE यात्रियों को अपग्रेड करने का ऑप्शन दे सकते हैं। कई बार चार्ट बनने के बाद AC सीटें खाली बच जाती हैं और ऐसे में RAC या वेटिंग वाले यात्रियों को प्रायोरिटी दी जाती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर स्लीपर क्लास यात्रियों को भी एसी में सफर का मौका मिल सकता है।
स्लीपर टिकट पर सीधे AC में बैठना नियमों के खिलाफ माना जाता है। यदि TTE आपको AC सीट अलॉट करते हैं, तो यात्री को स्लीपर और AC टिकट के बीच का किराया देना पड़ता है। बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए AC कोच में सफर करने पर जुर्माना भी लग सकता है।
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टिकट बुकिंग के दौरान ऑटो अपग्रेड का ऑप्शन चुनने वाले यात्रियों को फायदा मिल सकता है। यदि यात्रा वाले दिन AC कोच में सीट खाली रहती है, तो रेलवे सिस्टम खुद ही यात्री की सीट अपग्रेड कर सकता है। इसके लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होती।
कई बार ट्रेन में बुजुर्ग, महिलाएं या मेडिकल जरूरत वाले यात्रियों को प्रायोरिटी के आधार पर बेहतर सीट दी जाती है। ऐसे में TTE से सही तरीके और विनम्रता से बात करने पर मदद मिलने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि अंतिम फैसला पूरी तरह सीट उपलब्धता पर होता है।
कुछ यात्री बिना अनुमति AC कोच में जाकर बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा करना रेलवे नियमों का उल्लंघन है। जांच के दौरान TTE एक्स्ट्रा किराया और पेनल्टी दोनों वसूल सकते हैं। इसलिए हमेशा नियमों के तहत ही सीट अपग्रेड कराने की कोशिश करनी चाहिए।
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