बेटी को जन्म देने तक सांसें रोके रही मां, 37 दिन तक दूध समान अमृत पिलाया और फिर दुनिया छोड़ दी

Published : Jan 21, 2020, 06:25 PM IST
बेटी को जन्म देने तक सांसें रोके रही मां, 37 दिन तक दूध समान अमृत पिलाया और फिर दुनिया छोड़ दी

सार

भावुक करने वाली यह कहानी कैंसरग्रस्त मां और उसकी बच्ची से जुड़ी है। 14 जनवरी को मां ने यह दुनिया छोड़ दी। डॉक्टरों को भी मालूम था कि वो अगर कीमोथैरेपी कर देंगे, ता गर्भ में पल  रहे नवजात को नहीं बचाया जा सकेगा। लिहाजा, मां ने खुद इसके लिए मना कर दिया।

इंदौर, मध्य प्रदेश. कहते हैं कि बच्चे का जन्म एक मां के लिए खुद का भी पुनर्जन्म होता है। ऐसे भी कई मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें बच्चे को जन्म देने के बाद मां की मौत हो गई। यह भावुक कहानी भी बच्चे के जन्म और मां की मौत से जुड़ी है। लेकिन इसमें मां को मालूम था कि उसका बच पाना नामुमकिन है। मां को स्पिंडल सेल सरकोमा नामक घातक कैंसर(हड्डियों) था। लेकिन उसके जज्बे ने बेटी के जन्म तक खुद को जिंदा रखा। बेटी को 37 दिनों तक अमृत समान अपना दूध पिलाया और फिर इस दुनिया से चली गई।


बच्चे की खातिर कीमोथैरेपी से कर दिया था मना..
यह कहानी है 19 वर्षीय सविता तंवर की है। सविता तंवर ने 14 जनवरी को अंतिम सांस ली। इससे पहले उसने अपनी बेटी को खूब दुलारा। सविता को मां बनकर इस दुनिया से विदा होने का सुख एमवाय हॉस्पिटल ने दिलाया। यहां के डॉक्टरों ने यह डिलीवरी की थी। सविता को पैर में एक गांठ हुई थी। 17 दिसंबर, 2018 को अरबिंदो हॉस्पिटल में उसे भर्ती कराया गया था। यहां उसे कैंसर का पता चला था। यह कैंसर धीरे-धीरे पैर की हड्डी में फैलने लगा था। उसका पैर चार गुना बड़ा हो गया था। पति ने इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऑपरेशन कराया, लेकिन तीन महीने बाद फिर गांठ उभर आई। तब मायके वाले उसे एमवाय हॉस्पिटल लाए। यहां पेट दर्द होने पर सोनाग्राफी कराई गई, तब पता चला कि उसे 15 सप्ताह का गर्भ है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर भी चिंतित हो उठे। क्योंकि अगर वे कीमोथैरेपी करते, तो गर्भ में पल रहे बच्चे को नहीं बचाया जा सकता था। आखिरकार सविता ने ही इसके लिए मना कर दिया। बाद में डॉक्टरों ने एक ट्यूमर बोर्ड बनाया। इसमें शिशु रोग विशेषज्ञ नीलेश जैन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित्रा यादव, कैंसर विशेषज्ञ डॉ. प्रीति जैन व डॉ. सुधीर कटारिया, हिस्टो पैथोलॉजी विभाग से डॉ. शिखा घनघोरिया व अन्य डॉक्टर शामिल किए गए। डॉक्टरों ने बगैर कीमोथैरेपी सविता का इलाज शुरू किया। लेकिन सविता का कैंसर अंतिम चरण में पहुंच गया था। आखिर में उसने बेटी को जन्म दिया और फिर चल बसी।

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