पन्ना में दर्द, आंसू, मातम और सन्नाटा : 25 शव पहुंचे तो नम हो गई हर आंख, गांव में एक साथ जलेंगी आठ-आठ चिताएं

Published : Jun 07, 2022, 09:08 AM ISTUpdated : Jun 07, 2022, 09:29 AM IST
पन्ना में दर्द, आंसू, मातम और सन्नाटा : 25 शव पहुंचे तो नम हो गई हर आंख, गांव में एक साथ जलेंगी आठ-आठ चिताएं

सार

उत्तरकाशी में रविवार को हुए दर्दनाक हादसे में तीर्थयात्रियों के भरी बस खाई में गिर गई थी। इस हादसे में पन्ना के तीर्थयात्रियों की मौत हुई है। आज सभी के शव गांव पहुंच गए हैं। उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 9 गांवों में मातम परसा हुआ है।

पन्ना : मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) का पन्ना (Panna) में मातम पसरा हुआ है। इस जिले के 26 लोगों की मौत उत्तरकाशी में रविवार को हुए बस हादसे में हो गई। 25 शव जब गांव पहुंचे तो चीख-पुकार मच गई। आज सभी तीर्थयात्रियों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस हादसे से यहां के 9 गांवों में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। किसी गांव में एक ही परिवार के छह सदस्यों की चिताएं एक साथ जलेंगी तो कहीं गांव में आठ-आठ चिताएं। इस हादसे में किसी ने अपना पति खोया है तो किसी ने पिता। हर तरफ सिर्फ सिसकियां ही सुनाई दे रही हैं। सोमवार शाम करीब 7.30 बजे एयरफोर्स के विमान से सभी तीर्थयात्रियों के पार्थिव देह खजुराहो लाया गया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शवों को अलग-अलग वाहनों से गांवों में भिजवाया। 

एक साथ जलेंगी चिताएं
पन्ना के गांव सांटा में आज एक साथ आठ चिताएं जलेंगी। पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। 1500 आबादी वाले इस गांव के आठ लोगों की मौत उत्तरकाशी बस हादसे में हो गई है। गांव के लोगों का कहना है ऐसा कभी नहीं हुआ जब एक साथ इतनी लाशें हमने एक साथ देखी हो। हमारे डॉक्टर साहब राजाराम सिंह भी अब नहीं रहे। उनके बिना हमारा इलाज कैसे होगा? डॉक्टर राजाराम अपनी पत्नी गीता सिंह और छतरपुर जिले के बिजावर में रहने वाली बहन जनक सिंह के साथ तीर्थयात्रा पर गए थे लेकिन किसी को क्या पता कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। गांव में मौत की खबर आने के बाद से ही किसी घर में चूल्हा तक नहीं जला है। 

मम्मी-पापा, चाचा-चारी, दादी कोई न बचा
सांटा गांव के ही बृजेश द्विवेदी का पूरा परिवार इस हादसे में खत्म हो गया। उनकी सिसकियां ही बंद नहीं हो रही। आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के छह सदस्य इस हादसे का शिकार हुए हैं। मम्मी प्रभा, पापा दिनेश, चाचा-चाची, दादी और एक अन्य चाचा अब कभी भी लौटकर नहीं आएंगे। उनका तो सबकुछ खत्म ही हो गया। बृजेश ने बताया कि हादसे के कुछ देर पहले ही उनके पापा ने वीडियो कॉल पर उन्हें पहाड़ और वहां की वादियां दिखाई थी लेकिन आधे घंटे में ही सब तबाह हो गया। सांटा गांव में जिन लोगों की इस हादसे में मौत हुई है, उनमें राजकुमार 38 साल के और राजकुंवर 82 साल की थीं। 

आखिरी हुई पांचवी तीर्थयात्रा पर गए
इस हादसे में अमानगंज के उडला पंडवन के रहने वाले पूर्व सरपंच राम भरोसी कुसमहा और उनकी धर्मपत्नी शीला की यह पांचवी तीर्थयात्रा थी, जो आखिरी साबित हुई। पति-पत्नी हर दो साल में जल चढ़ाने तीर्थ यात्रा पर जाया करते थे। राम भरोसी के परिजन ने बताया कि वे आठ बार गांव में भागवत करवा चुके थे। उनकी काफी आस्था थी। हादसे में जिन गांवों लोगों की मौत हुई है,  उनमें सांटा के 8, पवई के दो, सिमरिया के दो, चिखला के एक,  मोहंद्रा के चार, कुंवरपुर के दो, कोनी के दो,  ककरहटा के एक और उड़ला गांव के दो लोग शामल थे।

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