बेंगलुरु: 15 जनवरी को होगा 112 फुट के आदियोगी का अनावरण, दिखाया जाएगा अनूठा लाइट एंड साउंड शो

Published : Jan 13, 2023, 06:47 PM ISTUpdated : Jan 13, 2023, 06:48 PM IST
बेंगलुरु: 15 जनवरी को होगा 112 फुट के आदियोगी का अनावरण, दिखाया जाएगा अनूठा लाइट एंड साउंड शो

सार

उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ रविवार शाम 6 बजे बेंगलुरु के पास चिक्काबल्लापुरा में 112 फुट के आदियोगी का अनावरण करेंगे। अनावरण के बाद आदियोगी दिव्य दर्शनम होगा। यह 112 फुट के आदियोगी पर मैप किया गया 14 मिनट का अनूठा लाइट एंड साउंड शो है।   

बेंगलुरु। बेंगलुरु के पास चिक्काबल्लापुरा में 15 जनवरी को 112 फुट के आदियोगी का अनावरण किया जाएगा। इस मौके पर ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई मौजूद रहेंगे। आदियोगी की 112 फुट की मूर्ति कोयम्बटूर के ईशा योग केंद्र की प्रतिकृति है। 

आदियोगी का अनावरण जगदीप धनखड़ शाम 6 बजे करेंगे। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में 21 दिवसीय आदियोगी रथ यात्रा शुरू हुई थी। यह रथ यात्रा आदियोगी के अनावरण से पहले चिक्काबल्लापुरा पहुंच गई है। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। 

सद्गुरु ऐप और सद्गुरु के यूट्यूब पर अनावरण का होगा लाइव प्रसारण
आदियोगी अनावरण को सद्गुरु ऐप और सद्गुरु के यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम चैनलों पर लाइव देखा जा सकता है। अनावरण के बाद आदियोगी दिव्य दर्शनम होगा। यह 112 फुट के आदियोगी पर मैप किया गया 14 मिनट का अनूठा लाइट एंड साउंड शो है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने कोयम्बटूर के ईशा योग केंद्र में स्थापित आदियोगी की 112 फुट की मूर्ति को "अतुल्य भारत" डेस्टिनेशन के रूप में सूचीबद्ध किया है। इस प्रतिमा को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया में "सबसे बड़ी बस्ट मूर्तिकला" के रूप में भी मान्यता दी गई है।

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योगेश्वर लिंग की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे सद्गुरु
आदियोगी पर प्रोजेक्शन शो ने प्रतिष्ठित मोंडो*डॉ पुरस्कार भी जीता है। चिक्काबल्लापुरा केंद्र में 15 जनवरी से हर शाम आदियोगी दिव्य दर्शनम के साथ लाइट एंड साउंड शो देखने को मिलेगा। हजारों लोग इस उत्सव में भाग लेंगे। गौरतलब है कि सद्गुरु सन्निधि दुनिया भर में आध्यात्मिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के सद्गुरु के दृष्टिकोण का एक हिस्सा है। इससे पूरी मानवता को आध्यात्मिकता के झलक मिलेगी। सद्गुरु मानव तंत्र में पांच चक्रों की अभिव्यक्ति के रूप में आदियोगी के पास योगेश्वर लिंग की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। योगेश्वर लिंग की उपस्थिति से आदियोगी एक जीवित इकाई बन जाएंगे।

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