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जोशीमठ के विस्थापितों को मिलेगा मनरेगा में काम, हर घर के लिए मुआवजा का ऐलान, जानिए एक परिवार को कितना मिलेगा?
Joshimath sinking: जोशीमठ लगातार धंस रहा है। इसरो की ताजा तस्वीरों में भी यह सामने आया है। हालांकि, देश की सबसे प्राचीनतम आध्यात्मिक नगरी की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है? यह जवाबदेही अभी तय की जानी बाकी है। उत्तराखंड सरकार की देखरेख में आठ संस्थाएं यह पता लगाने में जुटी हैं कि जोशीमठ के धंसने की वजह क्या है? इस डूब रहे शहर के वहन क्षमता का आंकलन करने के साथ यहां विकास के नाम पर चल रहे प्रोजेक्ट्स का भविष्य भी इन्हीं की रिपोर्ट्स के बाद तय किया जाएगा। उधर, सरकार ने जोशीमठ के विस्थापितों के लिए मनरेगा में काम का प्रबंध कर दिया है। राहत शिविरों में भी लोगों को लगातार पहुंचाया जा रहा है। अभी तक चार हजार लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचा जा चुका है।

जोशीमठ के विस्थापित परिवारों के लिए सरकार ने मनरेगा में काम का इंतजाम किया है। विस्थापित प्रत्येक परिवार के दो सदस्यों को मनरेगा के तहत काम किया जाएगा। राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए 450 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से हर रोज खाने पर खर्च किया जाएगा। यही नहीं सरकार ने हर परिवार को अगले छह महीना तक बिजली और पानी के बिलों के पेमेंट में छूट दी है। पशुओं रखरखाव के लिए हर पशुपालक को 15 हजार रुपये दिया जाएगा।
उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि प्रत्येक विस्थापित परिवार को फिलहाल मुआवजा के रूप में डेढ़ लाख रुपये मिलेंगे। इस डेढ़ लाख रुपये में 50 हजार रुपये शिफ्टिंग के लिए दिया जा रहा है और एक लाख रुपये मुआवजा का एडवांस है।मुआवजा की अभी तय नहीं की गई है। यह रकम देकर केवल अस्थायी उपाय किया गया है।
उत्तराखंड सरकार के सभी मंत्री जोशीमठ में राहत कार्यों के लिए अपने एक महीने का वेतन को मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करेंगे। तमाम समाजिक संस्थाओं ने भी राहत कार्य के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है।
उधर, एनटीपीसी ने दावा किया है कि जोशीमठ के हालात के लिए एनटीपीसी द्वारा संचालित कोई भी प्रोजेक्ट जिम्मेदार नहीं है। सरकारी फर्म ने बिजली मंत्रालय को बताया है कि इस क्षेत्र के धंसने में उसकी कोई भूमिका नहीं है। तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट से जुड़ी 12 किलोमीटर लंबी सुरंग जोशीमठ शहर से 1 किलोमीटर दूर और जमीन से कम से कम एक किलोमीटर नीचे है।
इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा कार्टोसैट-2एस सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों को जारी किया गया। इन तस्वीरों से पता चलता है कि जोशीमठ 27 दिसंबर से 8 जनवरी के बीच 5.4 सेंटीमीटर डूब गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2 जनवरी 2022 को जमीन धंसने की घटना हुई थी। इस घटना से जोशीमठ की जमीन के तेजी से धंसने की शुरुआत हुई। मध्य जोशीमठ में मिट्टी तेजी से खिसकी है। इस इलाके में सेना का हेलीपैड और एक मंदिर है। मिट्टी धंसने का केंद्र जोशीमठ-औली रोड के पास 2,180 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। जोशीमठ के डूबने की रफ्तार पिछले महीनों में बहुत कम थी। पिछले साल अप्रैल से नवंबर के बीच जोशीमठ की जमीन नौ सेमी धंस गई थी।
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