
नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण के खिलाफ प्लाज्मा थेरेपी एक बड़ा हथियार माना जा रहा था, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि अभी इसपर कोई रिसर्च नहीं है कि इससे मरीज ठीक हो जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, अगर सही गाइडलाइंस को फॉलो करते हुए प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल नहीं किया गया तो इससे जान भी जाने का खतरा है। भारत में अभी रिसर्च या ट्रायल में भी प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
प्लाज्मा थेरेपी पर आईसीएमआर रिसर्च कर रहा
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्लाज्मा थेरेपी पर कहा, प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग किया जा रहा है, हालांकि अभी इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इसका इस्तेमाल बहुत प्रभावी है। प्लाज्मा थेरेपी पर आईसीएमआर अध्ययन कर रहा है। जब तक आईसीएमआर (ICMR) अपनी रिसर्च पूरी नहीं कर लेता और एक मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिल जाता, तब तक प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग केवल रिसर्च के उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। यदि उचित गाइडलाइन के तहत प्लाज्मा थेरेपी का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जाता है, तो यह जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
भारत में कोरोना से 1 व्यक्ति की मौत बराबर दुनिया में 200 मरीजों की मौत
लव अग्रवाल ने बताया, भारत में कोरोना महामारी पर कितना नियंत्रण है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अगर भारत में कोरोना से एक मरीज की मौत होती है तो वह दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित 20 देशों में 200 मरीज की मौत के बराबर है। उन्होंने कहा कि कोरोना से प्रभावित उन 20 देशों की कुल आबादी भारत की आबादी के करीब-करीब बराबर है। 20 देशों में भारत के मुकाबले मरीजों की संख्या 84 गुना जबकि मरने वालों की संख्या 200 गुना है।
कोरोना से 29,435 संक्रमित, 24 घंटे में 1543 नए केस
लव अग्रवाल ने बताया, देश में कोरोना से कल 29435 लोग संक्रमित हैं। 21632 एक्टिव केस हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया, पिछले एक दिन में देश में 1543 नए मामले आए हैं। पिछले 24 घंटे में 684 लोग ठीक हुए हैं। कोरोना से रिकवरी रेट 23.3 प्रतिशत हो गया है।
17 जिलों में 28 दिन से एक भी केस नहीं आया
लव अग्रवाल ने बताया, देश में 17 ऐसे जिले हैं जहां पहले पॉजिटिव मामले मिले थे परन्तु पिछले 28 दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
सूरत में प्रवासी मजदूरों को बांटा जा रहा खाना
गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा, सूरत में प्रवासी मजदूरों के लिए एनजीओ, प्रशासन और इंडस्ट्रीज ने मिलकर खाने के पैकेट्स और राशन किट्स का इंतजाम किया। आईएमसीटी ने प्रशासन को श्रमिकों को कोरोना की जानकारी उन्हीं की भाषा में देने का सुझाव दिया है। सूरत का दौरान करने वाली टीम आईएमसीटी ने पाया कि प्रशासन व्यापक स्तर पर टेस्टिंग कर सकता है, ताकि कोरोना से पॉजिटिव केस सामने आ सके।
क्या है प्लाज्मा थेरेपी?
कोरोना से ठीक हो चुके मरीज के शरीर से प्लाज्मा लिया जाता है। प्लाज्मा खून में बनता है, इससे एक से दो लोगों को ठीक कर सकते हैं। प्लाज्मा थेरेपी में एंटीबॉडी का इस्तेमाल किया जाता है। किसी वायरस खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तभी बनता है, जब व्यक्ति संबंधित वायरस से पीड़िता हो। जैसे कि जो व्यक्ति कोरोना से पीड़ित होने के बाद ठीक हो गया, उस व्यक्ति के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंडीबॉडी बनता है। यह एंटीबॉडी तब ही बनता है जब मरीज ठीक हो जाता है, बीमार रहने के दौरान शरीर में तुरन्त एंटीबॉडी नहीं बनता है। कोरोना से जो व्यक्ति ठीक हो चुकी है उसके शरीर में एंटीबॉडी बना होता है। वह एंटीबॉडी उसके शरीर से निकालकर कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरी में डाल दिया जाता है। इससे मरीज के ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है।
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