
गुवाहाटी. 22 साल की उम्र में हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी गर्लफ्रेंड से कहा था कि वे एक दिन असम के मुख्यमंत्री बनेंगे। इस बात को आज 30 साल बीत गए हैं। हिमंत बिस्वा सरमा आ असम के सीएम हैं और गर्लफ्रेंड रिनिकी उनकी पत्नी हैं। रिनिकी ने हिमंत बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद ये किस्सा मीडिया से शेयर किया।
रिनिकी उस वक्त 17 साल की थीं और हिमंत 22 साल के। दोनों गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज में पढ़ते थे। जब रिनिकी ने हिमंत से पूछा कि वे अपनी मां को उनके बारे में क्या बताएंगी। इस पर सरमा ने कहा कि अपनी मां से कहना कि मैं एक दिन असम का सीएम बनूंगा।
22 की उम्र में कही बात सच साबित हुई- रिनिकी
रिनिकी बताती हैं कि हिमंत अपने भविष्य को लेकर एकदम निश्चिंत थे। उन्होंने मुझसे जो बात 22 की उम्र में कही थी, आज वह सच हो गई। उन्होंने बताया कि 9 मई को जब हिमंत घर लौटे तो उनके कहा, होने वाला मुख्यमंत्री। इस पर रिनिकी ने पूछा- कौन। हिमंत ने कहा- मैं।
असम के 15वें मुख्यमंत्री बने हिमंत
हिमंत बिस्वा सरमा ने 10 मई को गुवाहाटी में राज्य के 15वें सीएम के तौर पर शपथ ली। इस दौरान उनकी मां मृणालिनी देवी, रिनिकी भुयान सरमा और बेटी-बेटे इस पल के साक्षी बने।
विधायक बनने के बाद हुई शादी
रिनिकी ने बताया कि हमने जब शादी कि तब हिमंत मुख्यमंत्री थे। इसके बाद वे मंत्री बने। मैंने देखा है कि उन्होंने सारी स्थितियों को कैसे मैनेज किया। अब उन्होंने असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। लेकिन मुझे यह मानने में कुछ और दिन लगेंगे।
कौन हैं हिमंत सरमा?
हिमंत बिस्वा सरमा को आज असम ही नहीं पूर्वोत्तर की राजनीति में भाजपा का बड़ा चेहरा माना जा सकता है। 2015 में हिमंत के भाजपा में आने के बाद पार्टी को पूर्वोत्तर में असम के अलावा अन्य राज्यों में भी सरकार बनाने में सफलता मिली। यही वजह है कि हिमंत बिस्वा सरमा को पूर्वोत्तर का चाणक्य भी कहा जाता है।
कांग्रेस से शुरू किया राजनीतिक करियर
हिमंत ने कांग्रेस ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। वे 2001 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर जालुकबरी से चुनाव लड़े और जीते। इसके बाद वे लगातार तीन बार कांग्रेस के टिकट पर इसी सीट से चुनाव जीते। हिमंत के कद का पता इसी से चलता है कि वे गोगोई सरकार में हर बार मंत्रिपद पर रहे। उन्होंने सरकार में एग्रिकल्चर, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट, फाइनांस, कैबिनेट मिनिस्टर, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर जैसे मंत्रालय संभाले।
2011 में गोगोई की जीत में हिमंत की बड़ी भूमिका मानी जाती है। लेकिन उन्हें इस बार सरकार में ज्यादा महत्व नहीं दिया गया। यहां तक की उन्होंने कई बार राहुल गांधी से भी बात करने की कोशिश की। लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस छोड़ने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया था कि उन्होंने 8-9 बार राहुल गांधी से बात करने की कोशिश की। लेकिन राहुल ने उन्हें मौका नहीं दिया। वहीं, भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह सिर्फ एक फोन पर मिलने के लिए राजी हो गए। ऐसे में हिमंत ने शाह के घर पर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।
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