
नई दिल्ली. देश में बढ़ते हुए कोरोना केसों के बीच तेजी से वैक्सीनेशन हो रहे हैं। हालांकि, कुछ राज्यों से वैक्सीन की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसे में आरटीआई में खुलासा हुआ है कि भारत में वैक्सीनेशन प्रोग्राम के शुरू होने से 11 अप्रैल तक बड़ी मात्रा में वैक्सीन बर्बाद हुई है।
RTI के मुताबिक, देश में जनवरी से 11 अप्रैल तक वैक्सीन की 44 लाख डोज बर्बाद हुई हैं। इस मामले में तमिलनाडु सबसे आगे है। यहां 44 लाख में से 12.10% डोज बर्बाद हुई हैं। वहीं, हरियाणा में 9.74%, पंजाब में 8.12%, मणीपुर में 7.8% और तेलंगाना में 7.55% वैक्सीन की डोजे बर्बाद हुई हैं।
10 करोड़ डोज में 44 लाख हुईं बर्बाद
आरटीआई से मिले जवाब के मुताबिक, 11 अप्रैल तक लगीं 10 करोड़ में से वैक्सीन की 44 लाख डोज बर्बाद हुईं। हालांकि, केरल, बंगाल, हिमाचल, मिजोरम, गोवा, दमन और दीव, निकोबार आईसलैंड और लक्षदीप में वैक्सीन वेस्टेज नहीं हुई है।
1 मई से 18 साल से ऊपर के लोग भी लगवा सकेंगे वैक्सीन
देश में 16 जनवरी को वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू हुआ था। पहले चरण में हेल्थ वर्कर्स और कोरोना वॉरियर्स को वैक्सीन दी गई थी। 1 मार्च से शुरू हुए दूसरे चरण में 60 साल से ऊपर और 45 साल से अधिक उम्र के गंभीर बीमार लोगों को वैक्सीन दी गई। अभी 45 साल से ऊपर सभी लोगों को वैक्सीन दी जा रही है।
कैसे बर्बाद हो रही वैक्सीन?
दरअसल, वैक्सीन की एक शीशी में 10 या 20 डोज होती हैं। लेकिन एक बार शीशी खुलने के बाद इसे 4 घंटे में इस्तेमाल करना जरूरी है। अगर तय समय में ये इस्तेमाल नहीं हो पाती तो वैक्सीन खराब हो जाएगी। यानी सेंटर्स पर अगर लोग 10 या 20 नहीं हो पाते हैं, उससे थोड़े कम रहते हैं और वैक्सीन की शीशी खोली जाती है। तो उसमें कुछ मात्रा बर्बाद हो जाती है।
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