मॉब लिंचिंग पर पीएम मोदी को खत लिखने वाले 49 सेलेब्स को 62 सेलेब्रिटीज ने दिया करारा जवाब

Published : Jul 26, 2019, 01:34 PM ISTUpdated : Jul 26, 2019, 01:57 PM IST
मॉब लिंचिंग पर पीएम मोदी को खत लिखने वाले 49 सेलेब्स को 62 सेलेब्रिटीज ने दिया करारा जवाब

सार

पीएम को लिखे खत का विरोध करने वालों में कंगना रनोट, प्रसून जोशी, विवेक ओबेरॉय और मधुर भंडारकर जैसे सेलेब्रिटी शामिल हैं।

नई दिल्ली। पिछले दिनों मॉब लिंचिंग की घटनाओं और 'जय श्रीराम' नारे के बहाने हिंसा का विरोध करते हुए 49 सेलेब्रिटी ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी थी। इसके तीन दिन बाद शुक्रवार को 62 सेलेब्रिटी ने उन्हें जवाब देते हुए चिट्टी लिखी। पीएम को लिखे खत का विरोध करने वालों में कंगना रनोट, प्रसून जोशी और मधुर भंडारकर भी हैं। इनका कहना है कि कुछ लोग सिलेक्टिव तरीके से सरकार के खिलाफ गुस्सा दिखाते हैं। इनके विरोध का मकसद केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को बदनाम करना है। उन्होंने पूछा कि जब नक्सली आदिवासियों को निशाना बनाते हैं तब वो क्यों नहीं बोलते?

और क्या लिखा है जवाबी चिट्ठी में...
जवाबी खत में लिखा है- देश के 49 बुद्धिजीवियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर एक बार फिर सिलेक्टिव तौर पर चिंता जताई है, जिससे उनका राजनीतिक झुकाव साफ नजर आ रहा है। उन्होंने अपनी चिट्टी में लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए सवाल उठाए हैं। वहीं देश में आदिवासी हाशिए पर हैं लेकिन उस पर ये चुप हैं। जवाब देने वाले सेलेब्रिटीज में क्लासिकल डांसर और सांसद सोनल मानसिंह, वादक पंडित विश्वमोहन भट्ट, विवेक ओबेरॉय और विवेक अग्निहोत्री भी शामिल हैं।

49 लोगों ने लिंचिंग के खिलाफ की थी एक्शन की मांग...
पीएम मोदी को खत लिखने वालों में हिस्टोरियन रामचंद्र गुहा, एक्ट्रेस कोंकणा सेन शर्मा, फिल्मकार श्याम बेनेगल, अनुराग कश्यप समेत कई क्षेत्रों के लोग शामिल थे। उन्होंने लिखा- मुस्लिमों, दलितों और दूसरे अल्पसंख्यकों पर हो रही लिंचिंग पर रोक लगनी चाहिए। आजकल "जय श्री राम" हिंसा भड़काने का नारा बन गया है। यह अफसोसजनक है। मई 2014 के बाद जबसे आपकी सरकार आई, तबसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले के 90% मामले दर्ज हुए हैं। अगर हत्या के मामले में बिना पैरोल के मौत की सजा सुनाई जाती है तो फिर लिंचिंग के लिए क्यों नहीं? सरकार का विरोध करने वालों को 'राष्ट्र-विरोधी' या 'अर्बन नक्सल' नहीं कहा जाना चाहिए। संविधान की धारा 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हक देती है और असहमति जताना इसका ही एक हिस्सा है। 

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