
नई दिल्ली. भारत में करीब दो तिहाई लोग चाहते हैं कि आध्यात्मिक बौद्ध गुरु दलाई लामा को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। यह बात आईएएनएस -सीवोटर के तिब्बत सर्वे में सामने आई है। भारत में करीब 80% लोग आजाद तिब्बत चाहते हैं। 1951 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था। तब से यह उसी के नियंत्रण में है।
सर्वे में देशभर से 3000 लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें करीब 62.40% भारतीय दलाई लामा को भारत रत्न देने की मांग का समर्थन करते हैं। वहीं, 21.7% लोगों ने इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।
भारतीय आध्यात्मिक नेता के रूप में मानते हैं भारतीय
सर्वे के मुताबिक, दो तिहाई लोग दलाई लामा को आधुनिक भारत के अहम सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेता के रूप में देखते हैं। वहीं, इनमें से बड़ी संख्या में लोग दलाई लामा को भारतीय आध्यात्मिक नेता के रूप में मानते हैं, ना कि विदेशी के तौर पर।
80% लोग आजाद तिब्बत चाहते हैं- सर्वे
सर्वे के मुताबिक, करीब 80% भारतीय आजाद तिब्बत चाहते हैं। 68% से अधिक लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि दलाई लामा ने प्राचीन भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई है। यह सर्वे ऐसे वक्त में हुआ, जब भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा है। ऐसे में इस सर्वे में लोगों का गुस्सा नजर आ रहा है।
कौन हैं दलाई लामा?
दलाई लामा तिब्बती आध्यात्मिक नेता है। चीन तिब्बत पर अपना दावा पेश करता है। 13वें दलाई लामा ने 1912 में स्वतंत्र तिब्बत घोषित किया था। इसके बाद 1951 में चीन ने तिब्बत पर हमला कर दिया। उस वक्त तिब्बत में 14वें दलाई लामा को चुनने की प्रक्रिया चल रही थी। इस हमले में तिब्बत को हार का सामना करना पड़ा। इसके कुछ सालों बाद तिब्बत के लोगों ने चीन के शासन के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। हालांकि, यह असफल रहा। इसके बाद दलाई लामा को भारत का रुख करना पड़ा।
दलाई लामा 1959 में भारत आ गए। चीन इसका लगातार विरोध करता रहा। 1959 में उत्ताखंड के मैसूर में निर्वासित सरकार का गठन किया। बाद में हिमाचल के धर्मशाला में निर्वासित सरकार का मुख्यालय बनाया गया।
शांति के प्रतीक के रूप में बनी दलाई लामा की छवि
1989 में दलाई लामा को शांति का नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे तिब्बत की स्वायतता चाहते हैं।
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